Rajagopalachari Biography in Hindi : जीवन संघर्ष, विचारधारा और भारत निर्माण में योगदान

Updated: 14/01/2026 at 8:06 PM
Rajagopalachari Biography in Hindi

Rajagopalachari Biography in Hindi : ​सी. राजगोपालाचारी (C. Rajagopalachari), जिन्हें पूरे भारत में ‘राजाजी’ (Rajaji) के नाम से जाना जाता है, आधुनिक भारत के उन महान व्यक्तित्वों में से एक थे जिनका जीवन राजनीति, स्वतंत्रता संग्राम, प्रशासन, साहित्य और नैतिक दर्शन का अद्भुत संगम था। वे केवल एक स्वतंत्रता सेनानी या राजनेता ही नहीं थे, बल्कि एक गंभीर चिंतक, लेखक और समाज सुधारक भी थे। ​यदि आप Bharat ke last Governor General Rajaji के बारे में विस्तार से जानना चाहते हैं, तो उनकी आत्मकथा और आत्मकथात्मक लेखन हमें उनके जीवन संघर्ष, वैचारिक दृढ़ता और राष्ट्रसेवा के प्रति समर्पण को गहराई से समझने का अवसर प्रदान करता है।

​सी. राजगोपालाचारी का प्रारंभिक जीवन (Early Life of Rajaji)

​C Rajagopalachari biography in Hindi की शुरुआत उनके साधारण लेकिन प्रभावशाली बचपन से होती है। उनका जन्म 10 दिसंबर 1878 को तत्कालीन मद्रास प्रेसीडेंसी (वर्तमान तमिलनाडु) के थोरापल्ली नामक गाँव में हुआ था। उनका परिवार एक शिक्षित ब्राह्मण परिवार था। बचपन से ही राजाजी में अनुशासन, आत्मसंयम और अध्ययन के प्रति गहरी रुचि देखने को मिलती है।


​उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा स्थानीय विद्यालय से प्राप्त की और आगे चलकर उच्च शिक्षा के लिए मद्रास विश्वविद्यालय से कानून (Law) की पढ़ाई की। वकालत के पेशे में आने के बाद उन्होंने समाज की वास्तविक समस्याओं को बहुत नज़दीक से देखा, जिसने आगे चलकर उन्हें राजनीति और समाज सेवा की ओर प्रेरित किया।

आत्मकथा में बचपन और शिक्षा का वर्णन

​सी. राजगोपालाचारी की आत्मकथा (C. Rajagopalachari ki atmakatha) और उनके लेखों में उनके बचपन का वर्णन अत्यंत सादगीपूर्ण है। वे अपने जीवन की कमजोरियों और असफलताओं को भी ईमानदारी से स्वीकार करते हैं। उनका मानना था कि शिक्षा का उद्देश्य केवल नौकरी प्राप्त करना नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण (Character Building) होना चाहिए।

महात्मा गांधी से संपर्क और जीवन में परिवर्तन

​राजाजी के जीवन का सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब वे महात्मा गांधी के संपर्क में आए। गांधीजी के सत्य, अहिंसा और आत्मनिर्भरता के विचारों ने उन्हें गहराई से प्रभावित किया। गांधीजी उन्हें अपना ‘सचेतक’ (Conscience Keeper) मानते थे।


​Rajaji and Mahatma Gandhi relation की गहराई का अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि राजाजी ने वकालत जैसे सुरक्षित और प्रतिष्ठित पेशे को छोड़कर स्वतंत्रता आंदोलन में कूदने का निर्णय लिया। यह उनके जीवन का सबसे कठिन लेकिन सबसे सही फैसला था।

 Role of Rajaji in Indian Independence Movement (स्वतंत्रता संग्राम में भूमिका)

​सी. राजगोपालाचारी भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के अग्रिम पंक्ति के नेताओं में से एक थे। उन्होंने कई प्रमुख आंदोलनों में सक्रिय भाग लिया:


  • असहयोग आंदोलन (Non-Cooperation Movement): गांधीजी के आह्वान पर उन्होंने विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार किया।
  • ​सविनय अवज्ञा आंदोलन (Civil Disobedience Movement): ब्रिटिश कानूनों के खिलाफ शांतिपूर्ण विरोध।
  • ​Vedaranyam Salt March (वेदारण्यम नमक सत्याग्रह): जब महात्मा गांधी ने दांडी मार्च शुरू किया, तब दक्षिण भारत में नमक सत्याग्रह का नेतृत्व राजाजी ने ही किया था। उन्होंने तिरुचिरापल्ली से वेदारण्यम तक पदयात्रा कर नमक कानून तोड़ा।

उनकी आत्मकथा में जेल जीवन का वर्णन विशेष रूप से प्रेरणादायक है। वे बताते हैं कि जेल उनके लिए कष्ट का स्थान नहीं, बल्कि आत्मचिंतन का केंद्र था।

भारत के अंतिम गवर्नर जनरल और प्रशासनिक भूमिका

​First Indian Governor General of India के रूप में सी. राजगोपालाचारी का नाम इतिहास के पन्नों में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है। भारत की स्वतंत्रता के बाद उन्हें कई महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्त किया गया:


  • पश्चिम बंगाल के प्रथम भारतीय गवर्नर: विभाजन के समय शांति व्यवस्था बनाए रखने में उनकी भूमिका अहम थी।
  • ​भारत के अंतिम गवर्नर-जनरल (1948–1950): लॉर्ड माउंटबेटन के बाद उन्होंने इस सर्वोच्च पद की गरिमा बढ़ाई।
  • ​मद्रास राज्य (तमिलनाडु) के मुख्यमंत्री: मुख्यमंत्री के रूप में उन्होंने शिक्षा और समाज सुधार के कई कार्य किए।

इन पदों पर रहते हुए उन्होंने प्रशासन में नैतिकता, पारदर्शिता और सादगी को प्राथमिकता दी। Rajaji ka swatantra bharat me yogdan आज भी प्रशासनिक अधिकारियों के लिए एक मिसाल है।

स्वतंत्र पार्टी की स्थापना (Formation of Swatantra Party)

​राजाजी एक स्वतंत्र विचारक थे। जब उन्हें लगा कि कांग्रेस पार्टी ‘समाजवादी’ दिशा में बहुत अधिक जा रही है, जिससे व्यक्तिगत स्वतंत्रता और आर्थिक संतुलन प्रभावित हो सकता है, तब उन्होंने 1959 में कांग्रेस से अलग होकर स्वतंत्र पार्टी (Swatantra Party) की स्थापना की।

​वे मानते थे कि लोकतंत्र में एक मजबूत विपक्ष का होना अनिवार्य है। उनकी आत्मकथा में यह निर्णय एक सिद्धांतवादी कदम के रूप में दर्ज है।

साहित्यिक योगदान (Literary Works of C. Rajagopalachari)

​राजाजी केवल राजनेता नहीं थे, बल्कि एक उच्च कोटि के विद्वान और लेखक भी थे। उनके द्वारा लिखे गए ग्रंथ आज भी घर-घर में पढ़े जाते हैं:

  • रामायण और महाभारत: उन्होंने इन महाकाव्यों का अत्यंत सरल और रोचक रूपांतरण किया।
  • ​भज गोविंदम: उनके आध्यात्मिक लेख और अनुवाद उनकी विद्वता को दर्शाते हैं।
  • ​पुरस्कार: उन्हें उनकी साहित्यिक सेवाओं के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार से भी नवाजा गया।
Rajagopalachari Biography
Rajagopalachari Biography

भारत रत्न और अंतिम समय

​C. Rajagopalachari Bharat Ratna: उनकी असाधारण राष्ट्रसेवा के लिए 1954 में उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया गया। वे इस सम्मान को पाने वाले पहले तीन व्यक्तियों में से एक थे (डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन और सी.वी. रमन के साथ)।


​उनका निधन 25 दिसंबर 1972 को हुआ, लेकिन उनके विचार और ‘राजाजी मंत्र’ आज भी प्रासंगिक हैं।

निष्कर्ष (Conclusion)

​C. Rajagopalachari biography in Hindi को गहराई से पढ़ने के बाद यह साफ हो जाता है कि राजाजी सिर्फ एक पॉलिटिशियन नहीं बल्कि एक विजनरी लीडर थे। उनकी आत्मकथा केवल एक व्यक्ति की कहानी नहीं है, बल्कि यह स्वतंत्र भारत के उस वैचारिक संघर्ष (Ideological Struggle) की गाथा है जिसने हमारे देश के लोकतंत्र की नींव रखी। राजाजी एक ऐसे ‘युगपुरुष’ थे जिन्होंने सत्ता (Power) के ऊपर हमेशा अपने सिद्धांतों (Principles) को रखा।


​Rajaji ka swatantra bharat me yogdan इसलिए भी अतुलनीय है क्योंकि उन्होंने मुश्किल समय में भी अपनी ‘स्वतंत्र सोच’ को कभी नहीं छोड़ा। चाहे वह विभाजन के दौरान शांति स्थापित करना हो या First Indian Governor General of India के रूप में जिम्मेदारी संभालना, राजाजी ने हमेशा दूरदर्शिता का परिचय दिया। वे एक ऐसे निडर नेता थे जिन्होंने जवाहरलाल नेहरू जैसे बड़े नेताओं के सामने भी अपनी असहमतियों को बहुत ही तर्कपूर्ण ढंग से रखा। यही कारण है कि उन्हें ‘The Conscience Keeper of Gandhi’ कहा जाता था..

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FAQ

भारत के प्रथम भारतीय गवर्नर जनरल कौन थे? (Who was the first Indian Governor-General of India?)

उत्तर: स्वतंत्र भारत के पहले भारतीय गवर्नर जनरल सी. राजगोपालाचारी थे। इनसे पहले लॉर्ड माउंटबेटन इस पद पर थे, जो ब्रिटिश थे।

​सी. राजगोपालाचारी को ‘राजाजी’ क्यों कहा जाता है? (Why is C. Rajagopalachari called Rajaji?)

उत्तर: ‘राजाजी’ उनका उपनाम था जो उनके प्रति सम्मान और प्रेम प्रकट करने के लिए दिया गया था। उन्हें अक्सर उनके उपनाम ‘सीआर’ (CR) से भी जाना जाता था।

स्वतंत्र पार्टी (Swatantra Party) की स्थापना किसने और क्यों की?

उत्तर: स्वतंत्र पार्टी की स्थापना सी. राजगोपालाचारी ने 1959 में की थी। उन्होंने यह पार्टी कांग्रेस की समाजवादी नीतियों और ‘परमिट-लाइसेंस राज’ के विरोध में बनाई थी, ताकि देश में व्यक्तिगत स्वतंत्रता और मुक्त बाजार को बढ़ावा मिल सके।

महात्मा गांधी और राजाजी के बीच क्या संबंध था? (Relationship between Gandhi and Rajaji)

उत्तर: राजाजी महात्मा गांधी के बहुत करीबी सहयोगी थे। गांधीजी उन्हें अपनी “अंतरात्मा का रक्षक” (Conscience Keeper) कहते थे। इसके अलावा, राजाजी की बेटी लक्ष्मी का विवाह गांधीजी के सबसे छोटे बेटे देवदास गांधी से हुआ था, जिससे वे गांधीजी के समधी भी थे।

​सी. राजगोपालाचारी को भारत रत्न कब मिला? (When did Rajaji get Bharat Ratna?)

उत्तर: सी. राजगोपालाचारी को 1954 में भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ से सम्मानित किया गया था। वे इस सम्मान को पाने वाले पहले तीन व्यक्तियों में से एक थे।

​क्या सी. राजगोपालाचारी मद्रास के मुख्यमंत्री भी रहे थे?

उत्तर: हाँ, राजाजी 1952 से 1954 तक मद्रास राज्य (अब तमिलनाडु) के मुख्यमंत्री रहे। उनके कार्यकाल के दौरान उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण सुधार किए थे।

राजाजी की प्रसिद्ध पुस्तकें कौन सी हैं? (Famous Books by C. Rajagopalachari)

उत्तर: राजाजी एक महान विद्वान थे। उनकी सबसे प्रसिद्ध रचनाओं में रामायण और महाभारत का सरल हिंदी और अंग्रेजी अनुवाद शामिल है। इसके अलावा उन्होंने भगवद गीता और उपनिषदों पर भी टीकाएँ लिखी हैं।

​सी. राजगोपालाचारी का निधन कब हुआ?

उत्तर: राजाजी का निधन 25 दिसंबर 1972 को 94 वर्ष की आयु में चेन्नई में हुआ था।

First Published on: 14/01/2026 at 8:06 PM
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