
Bharat Ratna Dr. Bhagwan Das : भारतीय इतिहास (Indian History) के पन्नों में कुछ ऐसे नाम दर्ज हैं जिन्होंने न केवल Freedom Struggle में हिस्सा लिया, बल्कि अपनी कलम और विचारों से समाज की दिशा भी बदल दी। ऐसे ही एक महान व्यक्तित्व थे Dr. Bhagwan Das। जब भी हम Bharat Ratna Winners List को देखते हैं, तो 1955 में जिन दिग्गजों को यह सम्मान मिला, उनमें डॉ. भगवान दास का नाम प्रमुखता से आता है।
वे एक साथ कई भूमिकाओं में नजर आते हैं—एक Educationist, एक Philosopher, एक Social Reformer, और एक सच्चे Patriot। आज की इस Dr. Bhagwan Das Biography in Hindi में हम उनके जीवन के हर पहलू को गहराई से जानेंगे। चाहे वह Kashi Vidyapith की स्थापना हो या Annie Besant के साथ उनका जुड़ाव, उनका जीवन आज की युवा पीढ़ी (Young Generation) के लिए एक प्रेरणा है।
प्रारंभिक जीवन और पारिवारिक पृष्ठभूमि (Early Life and Family Background)
डॉ. भगवान दास का जन्म 12 जनवरी 1869 को भारत की सांस्कृतिक राजधानी Varanasi (Kashi) में हुआ था। उनका जन्म एक अत्यंत प्रतिष्ठित और समृद्ध ‘साह’ परिवार (Sah Family) में हुआ था, जो अपनी विद्वता और जमींदारी के लिए मशहूर था।
Education and Intelligence: बचपन से ही भगवान दास जी पढ़ने में बहुत तेज (Brilliant Student) थे। उस जमाने में जब शिक्षा पाना कठिन था, उन्होंने बहुत कम उम्र में अपनी पढ़ाई पूरी की।
उन्होंने अपनी Matriculation की परीक्षा सिर्फ 12 साल की उम्र में पास कर ली थी।
सिर्फ 16-17 साल की उम्र में उन्होंने Bachelor’s Degree और Master’s Degree हासिल कर ली।
उनके पास ज्ञान का इतना विशाल भंडार था कि वे संस्कृत (Sanskrit), हिंदी (Hindi), और अंग्रेजी (English) भाषाओं में धाराप्रवाह बोल और लिख सकते थे। यही कारण है कि आगे चलकर वे एक महान Theosophist and Scholar बने।
करियर की शुरुआत: डिप्टी कलेक्टर से इस्तीफा (Career & Turning Point)
अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद, Dr. Bhagwan Das ने सरकारी नौकरी ज्वॉइन की। 1890 से 1898 तक उन्होंने उत्तर प्रदेश (तब का United Provinces) में Deputy Collector (डिप्टी कलेक्टर) के रूप में कार्य किया।
लेकिन, उनका मन अंग्रेजों की गुलामी (British Rule) में नहीं लगा। उनके अंदर देशप्रेम की भावना हिलोरे ले रही थी। उन्हें महसूस हुआ कि एक सरकारी अधिकारी बनकर वे वह Social Change नहीं ला सकते जो वे चाहते हैं।- The Turning Point: 1899 में उन्होंने अपनी अच्छी-खासी सरकारी नौकरी से Resignation दे दिया। यह वह दौर था जब लोग सरकारी नौकरी पाने के लिए मरते थे, लेकिन डॉ. भगवान दास ने देश के लिए उसे त्याग दिया।
थियोसोफिकल सोसाइटी और एनी बेसेंट (Theosophical Society & Annie Besant)
डॉ. भगवान दास के जीवन में सबसे बड़ा वैचारिक बदलाव तब आया जब वे Theosophical Society के संपर्क में आए। यहाँ उनकी मुलाकात महान समाज सुधारक Dr. Annie Besant से हुई।
Annie Besant and Bhagwan Das Collaboration: ये दोनों मिलकर भारतीय संस्कृति और शिक्षा के लिए काम करने लगे।
डॉ. भगवान दास ने एनी बेसेंट के साथ मिलकर Central Hindu College की स्थापना में बहुत बड़ा योगदान दिया।
यही कॉलेज आगे चलकर महामना पंडित मदन मोहन मालवीय जी के प्रयासों से Banaras Hindu University (BHU) का आधार बना।
अगर आप History of BHU को गहराई से पढ़ेंगे, तो पाएंगे कि डॉ. भगवान दास का विजन उसमें समाहित था। वे मानते थे कि शिक्षा ऐसी होनी चाहिए जो आधुनिक भी हो और भारतीय मूल्यों (Indian Values) से जुड़ी भी हो।
काशी विद्यापीठ की स्थापना: एक क्रांतिकारी कदम (Founder of Kashi Vidyapith)
यह उनके जीवन का सबसे स्वर्णिम अध्याय है। 1920-21 में जब महात्मा गांधी ने Non-Cooperation Movement (असहयोग आंदोलन) शुरू किया, तो उन्होंने छात्रों से सरकारी स्कूल-कॉलेज छोड़ने की अपील की।
लेकिन सवाल यह था कि सरकारी कॉलेज छोड़कर छात्र कहाँ पढ़ेंगे? इस समस्या का समाधान Dr. Bhagwan Das ने निकाला। उन्होंने अपने मित्र Shiv Prasad Gupta के साथ मिलकर 10 फरवरी 1921 को Kashi Vidyapith (जो अब Mahatma Gandhi Kashi Vidyapith कहलाता है) की स्थापना की।
Role in Kashi Vidyapith: वे इस संस्थान के पहले Vice-Chancellor (कुलपति) बने।
उन्होंने यहाँ National Education Policy लागू की। यहाँ हिंदी माध्यम से पढ़ाई होती थी और छात्रों को देशप्रेम का पाठ पढ़ाया जाता था।
इस विद्यापीठ ने देश को लाल बहादुर शास्त्री और चंद्रशेखर आजाद जैसे Freedom Fighters दिए।
स्वतंत्रता संग्राम में भूमिका (Role in Indian Freedom Struggle)
डॉ. भगवान दास केवल किताबों तक सीमित नहीं थे। वे सड़कों पर उतरकर आंदोलन करने वाले नेता भी थे।
Congress Participation: वे Indian National Congress के सक्रिय सदस्य बने।
Jail Yatra: 1921 के असहयोग आंदोलन के दौरान उन्हें गिरफ्तार किया गया और जेल भेजा गया। जेल में रहकर भी उन्होंने लिखना और पढ़ना नहीं छोड़ा।
Chairman of Municipal Board: उन्होंने बनारस म्युनिसिपल बोर्ड के चेयरमैन के रूप में भी काम किया और शहर के विकास के लिए कई योजनाएं बनाईं।
वे हिंसा के सख्त खिलाफ थे। 1922 में जब Chauri Chaura Incident हुआ और गांधीजी ने आंदोलन वापस ले लिया, तो भगवान दास जी ने गांधीजी के निर्णय का समर्थन किया क्योंकि वे भी अहिंसा (Non-violence) के पुजारी थे।
राजनीतिक विचार और लेजिस्लेटिव असेंबली (Political Views & Legislative Assembly)
आजादी की लड़ाई के साथ-साथ वे विधायी कार्यों में भी सक्रिय थे।
1934 में वे Central Legislative Assembly के लिए चुने गए।
संसद में उनके भाषण बहुत ही प्रभावशाली होते थे। वे अक्सर शिक्षा, सामाजिक सुधार और सांप्रदायिक एकता (Communal Harmony) पर बोलते थे।
Dr. Bhagwan Das का मानना था कि राजनीति में नैतिकता (Ethics in Politics) होनी चाहिए। अगर राजनीति से धर्म (नैतिकता के अर्थ में) को निकाल दिया जाए, तो वह समाज के लिए खतरनाक हो जाती है।
दार्शनिक विचार और साहित्य (Philosophy and Literary Works)
एक Writer and Author के रूप में डॉ. भगवान दास का कद बहुत ऊंचा है। उन्होंने 30 से अधिक किताबें लिखीं। उनकी किताबें आज भी Philosophy Students के लिए किसी खजाने से कम नहीं हैं।
Dr. Bhagwan Das Famous Books List:
The Essential Unity of All Religions: यह उनकी सबसे प्रसिद्ध किताब है। इसमें उन्होंने बताया कि कैसे हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई और अन्य सभी धर्मों का मूल संदेश (Core Message) एक ही है। यह किताब Comparative Religion की बेस्ट किताबों में से एक मानी जाती है।
The Science of Social Organization: इसमें उन्होंने ‘मनुस्मृति’ की वैज्ञानिक व्याख्या की है।
The Science of Emotions: मानवीय भावनाओं पर लिखी गई यह एक अद्भुत मनोवैज्ञानिक कृति है।
Bhagavad Gita Dictionary: गीता को समझने के लिए उन्होंने यह शब्दकोश तैयार किया।
उनकी लेखन शैली (Writing Style) बहुत ही तार्किक (Logical) थी। वे अंधविश्वास के विरोधी थे लेकिन सच्चे अध्यात्म (True Spirituality) के समर्थक थे।

भारत रत्न सम्मान: 1955 (Bharat Ratna Award 1955)
स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद, देश ने उनके योगदान को पहचाना। Why did Bhagwan Das get Bharat Ratna? शिक्षा, दर्शनशास्त्र और स्वतंत्रता संग्राम में उनके आजीवन योगदान के लिए, भारत सरकार ने 1955 में उन्हें देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान Bharat Ratna से नवाजा।
यह सम्मान पाने वाले वे चौथे भारतीय थे। उनके साथ उसी वर्ष Jawaharlal Nehru और M. Visvesvaraya को भी यह सम्मान मिला था। यह उनके जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि (Achievement) थी।
व्यक्तिगत जीवन और विचार (Personal Life & Ideology)
डॉ. भगवान दास का व्यक्तिगत जीवन बहुत ही सादा था। वे “सादा जीवन, उच्च विचार” (Simple Living, High Thinking) की मिसाल थे।
Communal Harmony: बनारस में जब भी हिंदू-मुस्लिम तनाव होता था, डॉ. भगवान दास अपनी जान की परवाह किए बिना दोनों पक्षों को समझाने पहुंच जाते थे। वे कहते थे, “सभी धर्म एक ही ईश्वर की ओर ले जाने वाले अलग-अलग रास्ते हैं।”
Hindi Lover: वे हिंदी भाषा के प्रबल समर्थक थे और उन्होंने कई नए हिंदी शब्दों का निर्माण (Coinage) भी किया।
निधन और विरासत (Death and Legacy)
एक लंबा और यशस्वी जीवन जीने के बाद, 18 सितंबर 1958 को इस महान विभूति का निधन हो गया। वे 89 वर्ष के थे।
भले ही वे आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी विरासत अमर है:
Mahatma Gandhi Kashi Vidyapith आज भी हजारों छात्रों को शिक्षा दे रहा है।
उनकी किताबें आज भी दुनिया भर की यूनिवर्सिटीज में पढ़ाई जाती हैं।
वाराणसी में उनके नाम पर कई संस्थान और कॉलोनियां (जैसे भगवान दास नगर) हैं।
निष्कर्ष (Conclusion)
अंत में, Dr. Bhagwan Das Biography से हमें यह सीख मिलती है कि शिक्षा का असली मकसद सिर्फ नौकरी पाना नहीं, बल्कि समाज सेवा है। वे एक ऐसे Freedom Fighter थे जिन्होंने तलवार से नहीं, बल्कि कलम और विचारों से युद्ध लड़ा।
FAQ
Q1: Who was the 4th Bharat Ratna winner?
Ans: भारत के चौथे भारत रत्न प्राप्तकर्ता डॉ. भगवान दास थे, जिन्हें 1955 में यह अवार्ड मिला।
Q2: What is the most famous book of Dr. Bhagwan Das?
Ans: उनकी सबसे प्रसिद्ध किताब “The Essential Unity of All Religions” है।
Q3: Dr. Bhagwan Das ka Kashi Vidyapith mein kya role tha?
Ans: वे काशी विद्यापीठ के संस्थापक (Founder) और पहले कुलपति (First Vice-Chancellor) थे।
Q4: Dr. Bhagwan Das relation with Annie Besant?
Ans: वे एनी बेसेंट के सहयोगी थे और दोनों ने मिलकर थियोसोफिकल सोसाइटी और शिक्षा के लिए काम किया।
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