Dr. Dhondo Keshav Karve Biography in Hindi: भारत के 8वें भारत रत्न और महिला शिक्षा के जनक की पूरी कहानी

Updated: 22/01/2026 at 9:51 AM
Dr. Dhondo Keshav Karve Biography in Hindi: भारत के 8वें भारत रत्न और महिला शिक्षा के जनक की पूरी कहानी

क्या आप जानते हैं कि भारत में महिलाओं के लिए पहला विश्वविद्यालय (First Women’s University in India) किसने बनवाया था? या फिर वह कौन सा समाज सुधारक था जिसने 100 साल की उम्र में भारत रत्न प्राप्त किया? जी हाँ, हम बात कर रहे हैं भारत के 8वें भारत रत्न विजेता (8th Bharat Ratna Awardee) और महान समाज सुधारक डॉ. धोंडो केशव कर्वे (Dr. Dhondo Keshav Karve) की, जिन्हें दुनिया प्यार और सम्मान से ‘महर्षि कर्वे’ (Maharshi Karve) के नाम से भी जानती है।

आज के इस आर्टिकल में हम Dr Dhondo Keshav Karve biography in Hindi पर विस्तार से चर्चा करेंगे। हम जानेंगे कि कैसे एक गरीब परिवार में जन्मे बालक ने रूढ़िवादी समाज से लड़कर Widow Remarriage (विधवा विवाह) और Women’s Education (महिला शिक्षा) की मशाल जलाई। अगर आप इंटरनेट पर सर्च कर रहे हैं कि Dr DK Karve kon the या Maharshi Karve ka yogdan क्या था, तो यह आर्टिकल आपके लिए एक complete guide है।

कौन थे डॉ. धोंडो केशव कर्वे? (Who was Dr. Dhondo Keshav Karve?)

Dr. Dhondo Keshav Karve आधुनिक भारत के इतिहास में एक ऐसा नाम है, जिन्होंने अपना पूरा जीवन महिलाओं के उत्थान (Women Empowerment) के लिए समर्पित कर दिया। उनका जीवन संघर्ष और सफलता की एक मिसाल है। अक्सर प्रतियोगी परीक्षाओं और सामान्य ज्ञान (GK) में पूछा जाता है कि Who was the 8th Bharat Ratna Awardee? इसका उत्तर महर्षि कर्वे ही हैं।

उन्हें 1958 में, उनके 100वें जन्मदिन पर भारत सरकार ने देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ (Bharat Ratna) से नवाजा था। वे जीवित रहते हुए यह सम्मान पाने वाले सबसे उम्रदराज व्यक्ति थे। उन्होंने न केवल विधवाओं के पुनर्विवाह के लिए काम किया, बल्कि खुद एक विधवा से विवाह करके समाज के सामने उदाहरण पेश किया। उन्होंने ही भारत का Pahla mahila vishwavidyalaya (SNDT Women’s University) स्थापित किया था।

आइये, अब Dr. Dhondo Keshav Karve information in Marathi/Hindi के इस सफर को उनके बचपन से शुरू करते हैं।

प्रारंभिक जीवन और शिक्षा (Early Life and Education)

जन्म और परिवार (Birth and Family)

महर्षि कर्वे का जन्म 18 अप्रैल 1858 को महाराष्ट्र के रत्नागिरी जिले के ‘शेरावली’ (Sheravali) नामक एक छोटे से गाँव में हुआ था। उनका परिवार बहुत ही साधारण और गरीब था। उनके पिता का नाम केशव बापुन्ना कर्वे था। बचपन से ही धोंडो केशव कर्वे को पढ़ने-लिखने का बहुत शौक था, लेकिन आर्थिक तंगी हमेशा आड़े आती थी।

शिक्षा के लिए संघर्ष (Struggle for Education)

उस समय शिक्षा प्राप्त करना आसान नहीं था। Dr Dhondo Keshav Karve life story हमें सिखाती है कि अगर हौसले बुलंद हों तो गरीबी मायने नहीं रखती। अपनी शुरुआती पढ़ाई के लिए उन्हें मीलों पैदल चलना पड़ता था। उन्होंने अपनी प्राथमिक शिक्षा मुरुड (Murud) में पूरी की।

आपको जानकर हैरानी होगी कि मैट्रिक की परीक्षा पास करने के लिए उन्हें बहुत संघर्ष करना पड़ा। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और अंततः 1881 में मैट्रिक पास किया। इसके बाद वे उच्च शिक्षा के लिए मुंबई (तब का बॉम्बे) चले गए और Elphinstone College से गणित (Mathematics) में ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल की। वे गणित के बहुत अच्छे शिक्षक माने जाते थे और बाद में उन्होंने फर्ग्युसन कॉलेज (Fergusson College), पुणे में गणित के प्रोफेसर के रूप में भी काम किया।

सामाजिक सुधारों की ओर पहला कदम (First Step Towards Social Reforms)

19वीं सदी का भारतीय समाज रूढ़िवाद और अंधविश्वासों में जकड़ा हुआ था। उस समय बाल विवाह (Child Marriage) और सती प्रथा जैसी कुरीतियाँ तो थीं ही, लेकिन सबसे दयनीय स्थिति विधवाओं की थी। Dr. Dhondo Keshav Karve ने देखा कि समाज में विधवाओं के साथ जानवरों जैसा सलूक किया जाता था। उनका मुंडन कर दिया जाता था और उन्हें शुभ कार्यों से दूर रखा जाता था।

यहीं से उनके मन में समाज सुधार (Social Reform) का बीज अंकुरित हुआ। वे Social Reformer Dhondo Keshav Karve के रूप में अपनी पहचान बनाने की दिशा में आगे बढ़े। वे गोपाल कृष्ण गोखले और महादेव गोविंद रानाडे जैसे विचारकों से बहुत प्रभावित थे।

एक क्रांतिकारी निर्णय: विधवा विवाह (Widow Remarriage)

अक्सर लोग गूगल पर पूछते हैं—“Kis samaj sudharak ne vidhwa se shadi ki thi?” (किस समाज सुधारक ने विधवा से शादी की थी?)। इसका जवाब डॉ. कर्वे ही हैं। यह उनके जीवन की सबसे बड़ी घटना थी जिसने समाज को हिला कर रख दिया।

पहली शादी और पत्नी का निधन

धोंडो केशव कर्वे का विवाह बहुत छोटी उम्र में हो गया था (जो उस समय की प्रथा थी)। उनकी पहली पत्नी का नाम राधाबाई था। दुर्भाग्यवश, राधाबाई का निधन जल्दी हो गया। उस समय की परंपरा के अनुसार, समाज चाहता था कि वे दूसरी शादी किसी कम उम्र की कुंवारी लड़की से करें। लेकिन कर्वे के विचार बदल चुके थे।

गोदूबाई से विवाह (Marriage with Godubai)

1893 में, उन्होंने एक बाल विधवा गोदूबाई (Godubai) से विवाह करने का फैसला किया। गोदूबाई, जो बाद में आनंदीबाई कर्वे (Anandibai Karve) के नाम से जानी गईं, पंडिता रमाबाई के आश्रम में रहती थीं। Maharshi Karve wife name आनंदीबाई कर्वे ही है।

यह कदम उस समय किसी क्रांति से कम नहीं था। उनके अपने परिवार और समाज ने उनका बहिष्कार (boycott) कर दिया। उन्हें अपने ही गाँव में घुसने नहीं दिया गया। लेकिन कर्वे डिगे नहीं। उन्होंने न केवल शादी की बल्कि Widow Marriage Association (1893) की स्थापना भी की, ताकि अन्य लोग भी विधवा विवाह के लिए प्रेरित हो सकें।

महिला शिक्षा का महाअभियान (The Movement for Women’s Education)

डॉ. कर्वे का मानना था कि केवल विधवा विवाह काफी नहीं है, महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना ज्यादा जरूरी है। और आत्मनिर्भरता शिक्षा से ही आ सकती है। Maharshi Karve achievements में सबसे ऊपर महिला शिक्षा ही आती है।

अनाथ बालिकाश्रम की स्थापना (1896)

1896 में, उन्होंने पुणे के पास हिंगणे (Hingne) नामक स्थान पर एक ‘अनाथ बालिकाश्रम’ की स्थापना की। यहाँ विधवाओं और गरीब लड़कियों को शिक्षा दी जाती थी ताकि वे अपने पैरों पर खड़ी हो सकें। आज यह संस्था Hingne Stree Shikshan Samstha के नाम से प्रसिद्ध है।

शुरुआत में, उनके पास संसाधन नहीं थे। वे पैदल चलकर लोगों से चंदा मांगते थे। लोग उन पर फब्तियां कसते थे, लेकिन वे अपने लक्ष्य पर अटल रहे। यही कारण है कि आज Dr. Dhondo Keshav Karve Biography हर युवा के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

भारत का पहला महिला विश्वविद्यालय (First Women’s University in India)

यह Dr. Dhondo Keshav Karve के जीवन का सबसे बड़ा प्रोजेक्ट था। जब लोग पूछते हैं कि Founder of SNDT Women’s University कौन है, तो उन्हें कर्वे जी के विजन के बारे में जानना चाहिए।

जापान से प्रेरणा (Inspiration from Japan)

1915 में, उन्हें Japan Women’s University के बारे में एक पैम्फलेट पढ़ने को मिला। इससे वे इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने भारत में भी एक ऐसा विश्वविद्यालय बनाने की ठान ली जो विशेष रूप से महिलाओं के लिए हो।

SNDT की स्थापना (Establishment of SNDT)

1916 में, उन्होंने पुणे में भारत के पहले महिला विश्वविद्यालय की नींव रखी। उस समय उनके पास फंड्स की भारी कमी थी। बाद में, एक प्रसिद्ध उद्योगपति सर विट्ठलदास ठाकरसी (Sir Vithaldas Thackersey) ने अपनी माँ श्रीमती नाथीबाई दामोदर ठाकरसी (SNDT) की याद में 15 लाख रुपये का बड़ा दान दिया।

इस तरह, विश्वविद्यालय का नाम SNDT Women’s University पड़ा।

  • Key Fact: यह न केवल भारत का, बल्कि दक्षिण-पूर्व एशिया का पहला महिला विश्वविद्यालय था।

  • Search Query: Pahla mahila vishwavidyalaya kisne banaya? – उत्तर: डॉ. धोंडो केशव कर्वे।

आज इस यूनिवर्सिटी की शाखाएँ मुंबई और पुणे सहित कई जगहों पर हैं और लाखों लड़कियाँ यहाँ से शिक्षा प्राप्त कर रही हैं।

महर्षि कर्वे का वैश्विक भ्रमण (Global Tour at the age of 71)

आप सोच भी नहीं सकते कि जिस उम्र में लोग रिटायर होकर आराम करते हैं, उस उम्र में यानी 71 वर्ष की आयु में, डॉ. कर्वे ने Global Tour किया। वे यूरोप, अमेरिका और अफ्रीका गए।

उनका उद्देश्य केवल घूमना नहीं था, बल्कि वे दुनिया भर में Women’s Education और सामाजिक सुधारों पर अपने विचार रख रहे थे और अपनी संस्थाओं के लिए समर्थन जुटा रहे थे। वे जहाँ भी गए, लोगों ने इस बूढ़े लेकिन जवान हौसले वाले व्यक्ति का स्वागत किया। यह Dr Dhondo Keshav Karve information का एक बहुत ही रोचक पहलू है।

“समता संघ” और जाति उन्मूलन (Samata Sangh and Caste Eradication)

डॉ. कर्वे केवल महिला शिक्षा तक ही सीमित नहीं रहे। उन्होंने समाज में फैली छुआछूत और जाति प्रथा (Caste System) के खिलाफ भी आवाज़ उठाई।

  • Samata Sangh: 1944 में, उन्होंने ‘समता संघ’ की स्थापना की, जिसका उद्देश्य मानव समानता को बढ़ावा देना था।

  • Jati Nirmulan: उनका मानना था कि जब तक जाति प्रथा खत्म नहीं होगी, भारत असली मायने में आजाद नहीं हो सकता।

उनके ये विचार Dr. Dhondo Keshav Karve essay in Hindi लिखने वाले छात्रों के लिए बहुत महत्वपूर्ण पॉइंट हैं।

सम्मान और पुरस्कार (Awards and Recognition)

महर्षि कर्वे के त्याग और तपस्या को देश ने सराहा। उन्हें कई प्रतिष्ठित पुरस्कार मिले:

पद्म विभूषण (Padma Vibhushan – 1955)

भारत सरकार ने उन्हें 1955 में देश के दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान Padma Vibhushan से सम्मानित किया।

भारत रत्न (Bharat Ratna – 1958)

यह सबसे ऐतिहासिक पल था। 1958 में, जब डॉ. कर्वे ने अपने जीवन के 100 वर्ष पूरे किए (शताब्दी वर्ष), तब भारत सरकार ने उन्हें Bharat Ratna से नवाजा।

  • Search Query: Dr Karve Bharat Ratna year? – Answer: 1958.

  • Record: वे भारत रत्न प्राप्त करने वाले 8वें व्यक्ति थे और सबसे अधिक उम्र वाले भी।

डाक टिकट (Dhondo Keshav Karve Stamps)

भारतीय डाक विभाग ने उनके सम्मान में एक स्मारक डाक टिकट (Commemorative Stamp) भी जारी किया, जिसमें उनकी तस्वीर थी। यह उन्हें List of Bharat Ratna Awardees 1958 में अमर बनाता है।

डॉ. कर्वे का परिवार और विरासत (Family Legacy)

डॉ. कर्वे का परिवार भी समाज सुधार में पीछे नहीं रहा।

  • रघुनाथ कर्वे (Raghunath Karve): उनके पुत्र रघुनाथ कर्वे भी एक महान समाज सुधारक बने। उन्होंने भारत में परिवार नियोजन (Family Planning) और यौन शिक्षा (Sex Education) की वकालत की, जो उस समय एक बहुत बड़ा टैबू (Taboo) था।

  • इरावती कर्वे (Iravati Karve): उनकी पुत्रवधू इरावती कर्वे एक प्रसिद्ध समाजशास्त्री (Sociologist) और लेखिका थीं।

जीवन के अंतिम वर्ष और मृत्यु (Final Years)

डॉ. कर्वे का जीवन अत्यंत सादगीपूर्ण था। उन्होंने “निष्काम कर्म मठ” (Nishkam Karma Math) की स्थापना की थी, जिसका उद्देश्य निस्वार्थ सेवा करना था। वे 104 वर्ष तक जीवित रहे।

9 नवंबर 1962 को पुणे में उनका निधन हुआ। उनके जाने से भारत ने एक ऐसा Maharshi (महर्षि) खो दिया जिसने लाखों महिलाओं के जीवन में शिक्षा का प्रकाश फैलाया था। उनका जीवन परिचय Dr Dhondo Keshav Karve biography in Hindi हमें हमेशा प्रेरणा देता रहेगा।

डॉ. धोंडो केशव कर्वे के जीवन से सीख (Lessons from his Life)

अगर हम Dr DK Karve kon the से आगे बढ़कर सोचें, तो उनके जीवन से हमें कई महत्वपूर्ण सीख मिलती हैं:

  1. धैर्य और दृढ़ता (Patience and Perseverance): समाज के विरोध के बावजूद वे अपने लक्ष्य पर डटे रहे।

  2. उम्र केवल एक नंबर है (Age is just a number): 100 साल की उम्र में भी वे सक्रिय थे।

  3. सादगी (Simplicity): इतना बड़ा काम करने के बाद भी उनमें रत्ती भर भी अहंकार नहीं था।

  4. शिक्षा का महत्व: उन्होंने साबित किया कि शिक्षा ही समाज को बदलने का सबसे बड़ा हथियार है।

Conclusion

अंत में, भारत के 8वें भारत रत्न विजेता (8th Bharat Ratna Awardee) डॉ. धोंडो केशव कर्वे का जीवन एक खुली किताब है। उन्होंने उस दौर में महिलाओं के लिए SNDT University जैसे संस्थान खड़े किए जब महिलाओं को घर की दहलीज पार करने की भी इजाजत नहीं थी।

चाहे आप Maharshi Karve ka yogdan पर निबंध लिख रहे हों या उनके बारे में जानकारी खोज रहे हों, एक बात तो साफ है आधुनिक भारत के निर्माण में उनकी भूमिका को कभी भुलाया नहीं जा सकता। उनके द्वारा शुरू किया गया Widow Remarriage आंदोलन और महिला शिक्षा अभियान आज भी प्रासंगिक है।

हमें उम्मीद है कि Dr. Dhondo Keshav Karve Biography in Hindi का यह आर्टिकल आपको पसंद आया होगा। इसमें हमने कोशिश की है कि Dhondo Keshav Karve information in Marathi/Hindi से जुड़े सभी पहलुओं को कवर किया जाए।

FAQ 

यहाँ हम कुछ ऐसे सवालों के जवाब दे रहे हैं जो Google पर बार-बार पूछे जाते हैं (Long-Tail Keywords):

Who is known as Maharshi Karve? (महर्षि कर्वे किसे कहा जाता है?)

Ans: डॉ. धोंडो केशव कर्वे (Dr. Dhondo Keshav Karve) को उनके महान समाज सुधार कार्यों और सादगी के कारण ‘महर्षि’ (Maharshi) की उपाधि दी गई थी।

When did Dhondo Keshav Karve get Bharat Ratna? (धोंडो केशव कर्वे को भारत रत्न कब मिला?)

Ans: उन्हें 1958 में उनके 100वें जन्मदिन पर भारत रत्न (Bharat Ratna) से सम्मानित किया गया था। वे List of Bharat Ratna Awardees 1958 में इकलौते नाम थे।

What is the contribution of DK Karve in women’s education? (महिला शिक्षा में डॉ. कर्वे का क्या योगदान है?)

Ans: डॉ. कर्वे ने 1916 में भारत का पहला महिला विश्वविद्यालय (SNDT Women’s University) स्थापित किया। इसके अलावा उन्होंने ‘हिंगणे स्त्री शिक्षण संस्था’ और कई कन्या विद्यालय खोले।

Kis samaj sudharak ne vidhwa se shadi ki thi? (किस समाज सुधारक ने विधवा से शादी की थी?)

Ans: डॉ. धोंडो केशव कर्वे ने 1893 में एक विधवा, गोदूबाई (आनंदीबाई), से विवाह करके समाज के सामने एक मिसाल कायम की थी।

Dr Karve ne kaun sa university banaya? (डॉ. कर्वे ने कौन सी यूनिवर्सिटी बनाई?)

Ans: उन्होंने SNDT Women’s University (श्रीमती नाथीबाई दामोदर ठाकरसी महिला विद्यापीठ) की स्थापना की थी।

Who was the founder of SNDT Women’s University?

Ans: Dr. Dhondo Keshav Karve was the founder of SNDT Women’s University, established in 1916.

First Published on: 22/01/2026 at 9:51 AM
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