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Monday, June 14, 2021

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भारत में ब्लड कैंसर के बढ़ते मामलों के साथ ब्लड स्टेम सेल डोनेशन इस समय की विशेष ज़रूरत है

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भारत में ब्लड कैंसर के बढ़ते मामलों के साथ ब्लड स्टेम सेल डोनेशन इस समय की विशेष ज़रूरत है

संवाददाता (दिल्ली) भारत में कैंसर के सभी नए मामलों में से 8% ब्लड कैंसर के हैं। ब्लड कैंसर, थैलेसीमिया और एप्लास्टिक एनीमिया जैसे अन्य रक्त विकार तब तक जीवन के लिए खतरनाक हैं जब तक आपको आपके ब्लड स्टेम सेल से मिलनेवाले ब्लड स्टेम सेल के संभावित डोनर्स (देनेवाले) नहीं मिल जाते। भारत में हर साल रक्त विकारों के लगभग 1 लाख नए मामले सामने आते हैं जो बीमारी के बोझ को लगातार बढ़ा रहे हैं। इस भारी बोझ के बावजूद भारत में केवल 0.03% लोग ही संभावित ब्लड स्टेम सेल डोनर्स के रूप में रजिस्टर्ड हैं, जो कि दूसरे देशों की तुलना में बहुत कम है।
ब्लड स्टेम सेल डोनेशन , इसकी प्रक्रियाऔर इसके बाद के प्रभावों से जुड़ी कई भ्रांतियों के कारण स्टेम सेल रजिस्ट्रीज में भारतीय डोनर्स बहुत कम हैं जिसके कारण ब्लड कैंसर के पेशेंट्स के लिए स्टेम सेल डोनर ढूँढना बहुत मुश्किल हो जाता है। अब समय आ चुका है कि हम एक ब्लड स्टेम सेल डोनर होने के महत्व को समझें और जीवन रक्षक बनने के लिए प्रतिबद्ध हों। डीकेएमएस बीएमएसटी फाउंडेशन इंडिया , एक गैर लाभकारी संस्था है जो ब्लड स्टेम सेल डोनेशन रजिस्ट्रेशन करने के महत्व को समझने के लिए लोगों को जागरूक बनाने और हर ब्लड कैंसर पेशेंट के लिए एक असंबंधित स्टेम सेल डोनर देने के लिए काम कर रही है।

इस विषय में जागरूकता बढ़ाने के लिए, डॉ . दिनेश भूरानी, निदेशक , डिपार्टमेंट ऑफ़ हेमाटो-ऑन्कोलॉजी एवं बोन मेरो ट्रांसप्लांटेशन , राजीव गाँधी कैंसर इंस्टिट्यूट एंड रिसर्च सेण्टर , नई दिल्ली ने कहा है “ स्टेम सेल ट्रांसप्लांट थैलेसीमिया, सिकल सेल रोग और अप्लास्टिक एनीमिया जैसी कई बीमारियों का एकमात्र इलाज है। यह बढ़े हुए कैंसर वाले पेशेंट्स के लिए एकमात्र उम्मीद भी है। स्टेम सेल डोनर्स की निःस्वार्थ उदारता ने अनगिनत जानें बचाई हैं और कई परिवारों की खुशियाँ लौटाई हैं। स्टेम सेल डोनर बने,एक ज़िंदगी बचाएं!”

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पैट्रिक पॉल, डीकेएमएस बीएमटीएस फाउंडेशन इंडिया के सीईओ कहते हैं “यह समय है इस अंतर को संबोधित करने का और यह तब होगा जब हम डोनर रजिस्ट्रेशन बेस बढ़ाएँ।डोनर्स की बहुत कम संख्या जनता में जागरूकता की कमी और लोगों के बीच फैली हुई ब्लड स्टेम सेल ट्रांसप्लांट की प्रक्रियासे संबन्धित भ्रांतियों की ओर संकेत करती है। इन बाधाओं से निपटने और हर व्यक्ति को एक संभावित जीवन रक्षक बनने के लिए प्रोत्साहित करने का समय आ गया है।

ब्लड स्टेम सेल ट्रांसप्लांट से जुड़ी प्रमुख भ्रांतियों के बारे में बात करते हुए डॉ . दिनेश भूरानी आगे कहते हैं, “हम में से ज़्यादातर लोग मानते हैं कि ब्लड स्टेम सेल डोनेट करने का मतलब उन्हें हमेशा के लिए खो देना होता है और दान करने की प्रक्रिया में डोनर को बहुत परेशानी होती है होती है और जो भी ब्लड स्टेम सेल डोनेट करता है उसे लंबे समय तक इस प्रक्रिया से दुष्प्रभाव होते हैं, वास्तविकता यह है कि एक बार ब्लड स्टेम सेल डोनेट करने के बाद शरीर ब्लड स्टेम सेल्स को खुद पुनर्जीवित करता है और इस प्रक्रिया से डोनर को ब्लड स्टेम सेल्स का स्थाई नुकसान नहीं होता है और इस से डोनर की प्रतिरक्षा प्रणाली (इम्यून सिस्टम) कमजोर नहीं होगी। ब्लड स्टेम सेल्स पेरिफेरल ब्लड स्टेम सेल कलेक्शन (PBSC) के माध्यम से कलेक्ट किए जाते हैं जो पूरी तरह सुरक्षित गैर-सर्जिकल प्रक्रिया है। यह प्रक्रिया ब्लड प्लेटलेट डोनेशन, जिसे पूरा होने में 4-6 घंटे लगते हैं,के समान होती है और डोनेशन के बाद कोई दुष्प्रभाव) नहीं होते हैं। आपकी ब्लड स्ट्रीम में स्टेम सेल्स को इकट्ठा करने के लिए डोनेशन से पहले आपको दिए गए जी-सीएसएफ इंजेक्शन की वजह से आपको मामूली फ्लू जैसे लक्षण हो सकते हैं।

लोग हमेशा सोचते हैं कि ब्लड डोनेशन और ब्लड स्टेम सेल डोनेशन एक ही हैं; हालांकि, दोनों की प्रक्रिया एक जैसी होती है लेकिन ब्लड ट्रान्स्फ्यूजन के लिए संग्रह के विपरीत, ब्लड स्टेम सेल्स तब ही एकत्र किए जाते हैं जब डोनर और पेशेंट के बीच टिशू टाइप का ह्यूमन ल्यूकोसाइट एंटीजन (एचएलए) मेल खाता है। इसलिए, आप ट्रांसप्लांट की ज़रूरत वाले किसी ब्लड कैंसर पेशेंट के लिए एक मात्र मैच और जीवन रक्षक हो सकते हैं।

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दूसरी बड़ी भ्रांति है कि ब्लड स्टेम सेल्स और अम्बिलिकल कॉर्ड सेल्स समान होते हैं लेकिन तथ्य यह है कि स्टेम सेल ट्रांसप्लांट के लिए आवश्यक स्टेम सेल्स किसी भी लिंग के व्यक्ति द्वारा डोनेट किए जा सकते हैं और इनका अम्बिलिकल कॉर्ड सेल्स से कोई संबंध नहीं है।

आंकड़ों के अनुसार रक्त विकार वाले पेशेंट्स जिन्हें स्टेम सेल ट्रांसप्लांट की ज़रूरत होती है, में से 40% को ही अपने रिशतेदारों में मैच मिल पाता है और लगभग 60% पेशेंट्स को एक असंबंधित डोनर की ज़रूरत होती है। 18 से 50 साल की आयु के बीच का सामान्य स्वास्थ्य वाला कोई भी व्यक्ति ब्लड स्टेम सेल रजिस्ट्री में एक संभावित डोनर के रूप में रजिस्ट्रेशन करवा सकता है। पैट्रिक ने आगे कहा “एक रजिस्ट्री संभावित ब्लड स्टेम सेल डोनर्स का डेटा बैंक होता है जिसमे हजारों स्टेम सेल डोनर्स का विवरण होता है। भारत में पंजीकरण संख्या बहुत कम है जो लोगों में जागरूकता की कमी की तरफ संकेत करता है। अब समय इन बाधाओं से निपटकर हर व्यक्ति को एक संभावित जीवन रक्षक बनने के लिए प्रोत्साहित करने का”।

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