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सिडबी – सीआरआईएफ की रिपोर्ट से पता चलता है कि यथा दिसंबर 2020 तक भारतीय कपड़ा और परिधान उद्योग ने 1.62 लाख करोड़ रुपये का ऋण लिया

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संवाददाता (दिल्ली)

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सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के संवर्द्धन, वित्तपोषण और विकास में संलग्न प्रमुख वित्तीय संस्थान, भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (सिडबी) और सीआरआईएफ़ हाई मार्क, एक प्रमुख भारतीय क्रेडिट ब्यूरो, ने आज अपनी रिपोर्ट ‘उद्योग स्पॉटलाइट’ का तीसरा संस्करण लॉन्च किया जो ‘भारतीय कपड़ा और परिधान’ उद्योग का विश्लेषण करती है।

भारतीय कपड़ा और परिधान उद्योग में ऋण परिदृश्य
रिपोर्ट के अनुसार, यथा दिसंबर 2020 तक इस क्षेत्र द्वारा प्राप्त ऋण की कुल राशि `1.62 लाख करोड़ रही, जिसमें लगभग 20% की वर्षानुवर्ष गिरावट देखी गई। मार्च 2020 में कोविड-19 के लॉकडाउन के तत्काल बाद में विनिर्माण गतिविधियों के निलंबन के कारण ऐसा हुआ है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि यथा दिसंबर 2020 तक इस क्षेत्र में सक्रिय ऋणों (मात्रा की दृष्टि से) की संख्या 4.26 लाख रही।

उद्योग ने पिछले 2 वर्षों में अनअर्जक आस्तियों (90+ दिनों से बकाया ऋण मूल्य का अनुपात) में तिमाही गिरावट देखी है, जो सितंबर 2018 में 29.59% से सितंबर 2020 में 15.98% हो गई। दिसंबर 2020 में इन अनअर्जक आस्तियों में 0.94% की वृद्धि हुई जो दिसंबर 2019 में अनअर्जक आस्तियों की तुलना में लगभग 8% कम है।

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दिसंबर 2020 तक इस क्षेत्र से निर्यात आय घटी है
पिछले कुछ वर्षों से परिधानों ने निर्यात के अधिकांश हिस्से का योगदान दिया है, इसके बाद घरेलू कपड़े और वस्त्र का स्थान है। अलबत्ता, ‘उद्योग स्पॉटलाइट’ के तीसरे संस्करण के अनुसार, यथा दिसंबर 2020 तक निर्यात ऋण 25% कम रहा है, जिसका मुख्य कारण वैश्विक महामारी के कारण निर्यात में आई गिरावट है।
मात्रा के हिसाब से समग्र ऋण का एक बड़ा हिस्सा एमएसएमई उधारकर्ताओं के पास है
मात्रा के हिसाब से इस क्षेत्र को दिए गए कुल ऋण का 95% हिस्सा सूक्ष्म, लघु और मध्यम खंड के उधारकर्ताओं के पास केन्द्रित रहने के साथ इस उद्योग क्षेत्र में यथा दिसंबर 2020 तक लगभग 5 लाख उधारकर्ता मौजूद हैं।

शीर्ष कपड़ा उद्योग केंद्रों की भौगोलिक अंतर्दृष्टि
राज्य के स्तर पर, इस क्षेत्र की ऋण बही के 25% के ऋण संविभाग का सबसे बड़ा हिस्सा महाराष्ट्र राज्य के पास है।
रिपोर्ट में इस बात को रेखांकित किया गया है कि कपड़ा और परिधान निर्माण में समृद्ध 13 शीर्ष क्षेत्रों में यथा दिसंबर 2020 तक इस क्षेत्र के कुल ऋण संविभाग का 80% हिस्सा रहा। लगभग सभी राज्यों में ऐसे जिले हैं जिनमें कपड़ा और परिधान निर्माण करने वाली कई ऋण सक्रिय इकाइयाँ हैं। मुंबई और सूरत जैसे कुछ जिलों का ऋण संविभाग यथा दिसंबर 2020 तक 10,000 करोड़ रुपए से अधिक का रहा है।

सिडबी के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक श्री सिवसुब्रमणियन रमण ने कहा, “भारत में कपड़ा और परिधान उद्योग भारतीय अर्थव्यवस्था के सबसे पुराने और सबसे बड़े क्षेत्रों में से एक है और देश की रोजगार कहानी का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह क्षेत्र, निर्यात में पांचवां सबसे बड़ा है, जो देश की निर्यात आय का 12% और सकल घरेलू उत्पाद में 2% का योगदान करता है। भारत, वस्त्रों के क्षेत्र में विश्व में अग्रणी है और इसके पास संपूर्ण विनिर्माण मूल्य श्रृंखला है। केंद्रीय बजट 2021-22 में 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था हासिल करने की सोच में अर्थव्यवस्था के सभी क्षेत्रों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखा गया है और तदनुसार, वैश्विक स्तर पर भारत की कपड़ा प्रतिस्पर्धा को बढ़ाने के लिए, एकीकृत वस्त्र क्षेत्र और परिधान पार्क की एकीकृत योजना (एमआईटीआरए) की घोषणा भी की गई थी, जो घरेलू बाजार में तीव्र सुधार को परिदर्शित करने के लिए प्लग एंड प्ले सुविधाओं के साथ विश्व स्तरीय बुनियादी ढांचा तैयार करेगी।

सीआरआईएफ इंडिया के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यापालक अधिकारी श्री नवीन चंदानी ने कहा, “वैश्विक महामारी के बावजूद, कपड़ा और परिधान निर्माण में समृद्ध शीर्ष तेरह क्षेत्रों में यथा दिसंबर 2020 तक ऋण संविभाग का 75% हिस्सा प्रयुक्त हो रहा था। भारत में, परिधान और कपड़ा क्षेत्र में प्रत्येक राज्य का अपना अनूठा योगदान है। भारत सरकार ने मई 2020 में आत्मानिर्भर भारत कार्यक्रम के तहत एक विशेष आर्थिक पैकेज की घोषणा की, जो देशभर में बुनकरों और कारीगरों सहित बड़ी संख्या में छोटे पैमाने की संस्थाओं को लाभान्वित करने के लिए लक्षित है। सही नीतिगत हस्तक्षेप, कच्चे माल की प्रचुर उपलब्धता और उचित पहुँच के साथ-साथ उपलब्ध श्रम आधिक्य, इस महत्वपूर्ण क्षेत्र के विकास को आगे बढ़ावा दे सकता है।”

भारतीय कपड़ा और परिधान क्षेत्र के लिए ऋणदाता प्रोफाइल
सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक 62.61% की मात्रा के साथ यथा दिसंबर 2020 तक इस क्षेत्र को वित्त प्रदान करनेवाले प्रमुख ऋणदाता हैं। निजी बैंकों, एनबीएफसी और विदेशी बैंकों की हिस्सेदारी क्रमशः 23.49%, 8.66% और 1.41% रही है। मूल्य राशि की दृष्टि से यथा दिसंबर 2020 तक, निजी बैंकों की 40.54% की सबसे बड़ी हिस्सेदारी रही है। इसके बाद सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की 36.59%, विदेशी बैंकों की 9.14% और एनबीएफसी की 8.47% की हिस्सेदारी रही है।
उद्योग स्पॉटलाइट रिपोर्ट के बारे में: ‘उद्योग स्पॉटलाइट’ अपने प्रत्येक संस्करण में उद्योग क्षेत्रों पर आंकड़े और प्रवृत्तियाँ सुलभ करवाने वाली त्रैमासिक रिपोर्टों की एक श्रृंखला है, जिसका उद्देश्य नीति निर्माताओं को वास्तविक समय के आंकडों के माध्यम से मदद करना है, जो नीतियों को तैयार करने के लिए उपयोगी हो सकती है।

यह अपने जोखिम विश्लेषण के साथ-साथ क्षेत्र के ऋण परिदृश्य, प्रमुख उधारदाताओं, क्षेत्रीय संरचना और उधारकर्ता खंडों का विश्लेषण भी करता है। रिपोर्ट में संबंधित समूहों में एमएसएमई की स्थिति को ध्यान में रखते हुए समूहों के स्तर पर ऋण प्रवाह का विश्लेषण शामिल रहता है। पहला खंड सितंबर 2020 में, भारतीय ड्रग्स और फार्मास्युटिकल उद्योग पर केंद्रित किए जाने के साथ, प्रारम्भ किया गया था। इसके बाद भारतीय ऑटो और ऑटो घटक उद्योग विषय पर केन्द्रित अगला अंक जनवरी 2021 में जारी किया गया था।

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