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Monday, June 14, 2021

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EDII ने महामारी के बाद से स्टार्ट-अप विलेज एंटरेप्रेन्युरशिप प्रोग्राम के तहत 58,887 सूक्ष्म उद्यमियों को किया प्रशिक्षित

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EDII ने महामारी के बाद से स्टार्ट-अप विलेज एंटरेप्रेन्युरशिप प्रोग्राम के तहत 58,887 सूक्ष्म उद्यमियों को किया प्रशिक्षित

संवाददाता (दिल्ली) इस महामारी के दौरान दीनदयाल अंत्योदय योजना- राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन, ग्रामीण विकास मंत्रालय, भारत सरकार की उप-योजना स्टार्ट-अप विलेज एंटरेप्रेन्युरशिप प्रोग्राम के तहत तकरीबन 58,887 ग्रामीण उद्यमियों को भारतीय उद्यमिता विकास संस्थान (म्क्प्प् गैर- फार्म परियोजनाओं के कार्यान्वयन के लिए निर्दिष्ट राष्ट्रीय संसाधन संगठन है, और वर्तमान में 15 राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के साथ जुड़ा है) द्वारा विभिन्न रोजगार सृजन गतिविधियों में प्रशिक्षित किया गया है। गैर-फार्म सेक्टर के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में छोटे उद्यमों की स्थाना हेतु इन लघु-उद्यमियों एवं उनके परिवारजनों की मदद करना इस प्रोग्राम का उद्देश्य है।

प्रोग्राम के तहत भारत के 15 राज्यों में सभी 75 ब्लाॅक्स को कवर किया गया है, सूक्ष्म उद्यमिता को बढ़ावा देना और सूक्ष्म उद्यमियों के लिए अनुकूल प्रणाली का विकास करना इस प्रोग्राम का उद्देश्य है, ताकि ये उद्यम लम्बी दौड़ में विकसित हो सकें। 4 वर्षीय प्रोग्राम की शुरूआत साल 2016 में हुई। अब तक 58887 लोगों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है और 57184 सूक्ष्म उद्यमियों (सामुहिक उद्यमियों सहित) को इस प्रोग्राम के तहत पदोन्नत किया गया है। 1034 कम्युनिटी रिसोर्स पर्सन- एंटरप्राइज़ प्रोमोशन ;ब्त्च्.म्च्द्ध को ग्रामीण स्तर पर बिज़नेस कन्सलटेन्ट के रूप में प्रशिक्षित किया जा चुका है!

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मौजूदा महामारी के दौरान एमएसएमई सेक्टर पर सबसे बुरा असर हुआ है। छोटे कारोबारों और अनौपचारिक क्षेत्र के कर्मचारियों पर बहुत अधिक प्रभाव पड़ा है, क्योंकि दुनिया भर के देशों में वायरस के प्रसार को रोकने के लिए लाॅकडाउन या प्रतिबंध लगाए गए। हालांकि, इनमें से कुछ प्रशिक्षित उद्यमियों को अब कमाई का ज़रिया मिल गया है। आज तकरीबन 523 एसवीईपी प्रशिक्षित उद्यमी न केवल अपने कारोबार को जारी रखने में सफल हुए हैं, बल्कि उन्होंने मौजूदा स्थिति को देखते हुए मास्क, सैनिटाइज़र बनाने और फूड डिलीवरी जैसा काम शुरू कर लिया है। ये उद्यम उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, उड़ीसा, पश्चिम बंगाल, झारखण्ड, तेलंगाना, जम्मू-कश्मीर, छत्तीसगढ़ और हरियाणा के 32 ब्लाॅक्स में हैं।

परियोजना के बारे में बात करते हुए, डाॅ राजेश गुप्ता, प्रोजेक्ट हैड, एसवीईपी- म्क्प्प् ने कहा, ‘‘ग्रामीण भारत आज भी बड़े पैमाने पर कृषि पर निर्भर है तथा अनौपचारिक सेक्टरों पर चलता है। ऐसे कई उद्यमों के पास अपने कारोबार को बढ़ाने के लिए संसाधनों की कमी है। इस मुश्किल स्थिति में हालात और भी चुनौतीपूर्ण हो गए हैं। ऐसे में एसवीईपी प्रोग्राम के माध्यम से हम उन्हें प्रशिक्षण और संरक्षण प्रदान करना चाहते हैं। मुझे यह देखकर खुशी का अनुभव हो रहा है कि इनमें से ज़्यादातर ग्रामीण उद्यमियों ने अपने स्थानीय म्क्प्प् मेंटर्स से परामर्श लिया, उनके प्रशिक्षण का उपयोग किया और हालात के सामने घुटने नहीं टेकने का फैसला लिया। अपने राज्यों के ग्रामीण आजीविका मिशनांे एवं स्थानीय प्रशासन के सहयोग से वे महामारी के इस दौर में भी अपने कारोबार को जारी रखने में सफल हुए हैं। इस प्रक्रिया के दौरान उन्हें कमाई के साथ-साथ लर्निंग का मौका भी मिल रहा है। इस प्रोग्राम के तहत उन्हें बदलते वातावरण के अनुसार अपने आप में बदलाव लाने के लिए प्रशिक्षण दिया गया। वर्तमान में उनकी स्थिति इस बात की पुष्टि करती है कि प्रशिक्षण सफल हुआ है।’’

संकट के समय में इस तरह की दृढ़ मानसिकता और इनोवेशन की भावना उद्यमियों, खासतौर पर सूक्ष्म-उद्यमियों के लिए बेहद ज़रूरी है, जिनके पास संसाधनों की कमी होती है और थोड़ी सी मुश्किल उन्हें हिला सकती है। इस महामारी से हमारे देश को सबक दिया है कि सूक्ष्म-उद्यमियों की क्षमता निर्माण में निवेश समय की मांग है।

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