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के.एल. डीम्ड यूनिवर्सिटी के उद्यमी छात्रों ने वायरलेस चार्जिंग वाली अपनी तरह की पहली ई-बाइक तैयार की

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संवाददाता (दिल्ली): स्नातक एवं ऊँची शिक्षा के लिए देश के प्रमुख विश्वविद्यालयों में से एक, के.एल. डीम्ड यूनिवर्सिटी, के छात्रों ने वायरलेस चार्जिंग टेक्नोलॉजी वाली एक अद्वितीय ई-बाइक (इलेक्ट्रिक बाइक) को विकसित किया है। इस अभिनवकारी प्रतिकृति को विश्वविद्यालय के कुछ पूर्व छात्रों के साथ मिलकर के.एल. कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग के इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग विभाग के तृतीय एवं चतुर्थ वर्ष के छात्रों के एक दल द्वारा विकसित किया गया है। इस ई-बाइक में सैल बैलेंसिंग (Cell Balancing) और वायरलेस चार्जिंग (Wireless Charhing) समेत कई अत्याधुनिक विशेषतायें हैं जो कि पूरी दुनिया के कुछ ही स्थानों पर उपलब्ध हैं। इस टीम ने के.एल. डीम्ड यूनिवर्सिटी द्वारा निःशुल्क प्रदान की गई अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं और परीक्षण सुविधाओं का लाभ उठाते हुए ई-बाइक की प्रारंभिक संकल्पना और प्रतिकृति को विकसित किया था। इस दल को विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों और वरिष्ठ शिक्षाविदों से मार्गदर्शन एवं निरंतर प्रतिक्रियात्मक सुझाव प्राप्त हुए। इस विश्वविद्यालय ने इस परियोजना की संकल्पना को एक स्टार्ट-अप (Startup) के तौर पर विकसित करने के लिए इस टीम को रु. 1,40,000 का अनुदान प्रदान करने का भी प्रस्ताव दिया है।

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के.एल.यू. की टीम द्वारा विकसित की गई इस ई-बाइक से लोगों के लिए एक ऐसी चार्जिंग क्षमता के साथ 55 कि.मी. प्रति घंटे की अधिकतम गति से यात्रा कर पाना संभव होता है जो कि मानक परिस्थितियों में एक बार रिचार्ज करने पर 85 से 100 कि.मी. के बीच की दूरी तय कर सकती है और जिसके लिए रिचार्ज में 5 घंटे लगते हैं। इसकी चार्जिंग टेक्नोलॉजी के साथ एक प्रोग्राम किए जाने योग्य सैल बैलेंसिंग (Cell Balancing) सुविधा भी प्रदान की गई है जो अधिकतम बैटरी क्षमता प्रदान करती है ताकि चार्ज लंबे समय तक चल सके। इस टीम ने एक पहले से ही मौजूद बाइक को अनुरूपान्तरित किया है और इसे वायरलेस चार्जिंग वाली ई-बाइक्स की प्रतिकृति के तौर पर परिवर्तित किया है। इस टीम ने इस बाइक के डिजाइन में कई परिवर्तन किए जिसमें कंट्रोलर के माध्यम से बी.एल.डी.सी. मोटर (ब्रशलेस डी.सी. इलेक्ट्रिक मोटर) को गियर मॉड्यूल में सम्मिलित करना शामिल है।
छात्रों के उद्यम और उपलब्धि की सराहना करते हुए, के.एल. डीम्ड यूनिवर्सिटी के अध्यक्ष, इंजीनियर कोनेरू सत्यनारायण ने कहा, “वायरलेस तरीके से चार्ज की जाने वाली ई-बाइक
की यह परियोजना के.एल. विश्वविद्यालय के छात्रों के अभिनवकारी दृष्टिकोण और भविष्यवादी सोच को दर्शाता है। छात्रों को इस प्रकार की अभिनवकारी अवधारणाओं और टेक्नोलॉजी को प्रस्तुत करते हुए देखकर मुझे प्रसन्नता हो रही है। सभी प्राध्यापकगण इन छात्रों के जोश और कड़ी मेहनत की सराहना कर रहे हैं और साथ ही साथ हम छात्रों के साथ-साथ देश के दीर्घकालिक लाभ हेतु अनुसंधान और अभिनवता पर ध्यान देने के लिए विश्वविद्यालय के दृष्टिकोण पर पुनः बल देते हैं। हमें यकीन है कि हर स्थान के छात्रों को यह बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने के लिए प्रेरित करेगा।”

“हम पहले वर्ष के दौरान ही प्रयोगशाला की गतिविधियों से प्रतिकृतियाँ तैयार करने और प्रतियोगिताओं में भाग लेने में रुचि लेने लगे थे। के.एल. विश्वविद्यालय में प्रयोगशाला आधारित परियोजनाओं ने घटकों, मापों, मशीनों और पावर इलेक्ट्रॉनिक्स के साथ काम करने हेतु एक मज़बूत आधार प्रदान किया था। हम ऐसे अभूतपूर्व अवसर और संसाधन प्रदान करने और हमारे जोश और दृष्टिकोण को सहयोग प्रदान करने के लिए इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग (ई.ई.ई.) विभाग के प्रमुख, डॉ जरुपुला सोमलाल और इस विभाग के सभी प्राध्यापकों को धन्यवाद देना चाहते हैं। कौशल आधारित पाठ्यक्रमों ने मौलिक विषयों को और भी अधिक महत्व प्रदान किया, जिससे हमें आधुनिक उपकरणों और टेक्नोलॉजियों को सीखने में मदद मिली और हमारे अंदर प्रतियोगिताओं में भाग लेने का विश्वास पैदा हुआ। पूरी टीम के प्रयास और हमारे प्राध्यापकों के बहुमूल्य सुझावों के साथ वायरलेस तरीके से चार्ज की जाने योग्य ई-बाइक की इस परियोजना को सफलतापूर्वक पूरा करने पर हमें गर्व है”, बी.टेक. ई.ई.ई अंतिम वर्ष के छात्र, श्री एम सत्यार्ध प्रवाशिक ने कहा।

इस टीम के अन्य सदस्य जो इस परियोजना का हिस्सा थे उनमें बी.टैक. ई.ई.ई. 2017 बैच के छात्र, श्री चरण साई तिरुवुरी, श्री ए संदीप, श्री किरीती पोलासी, श्री एस लोकेश बाबू, श्री वी साई प्रवीण, और ई.ई.ई. विभाग के पूर्व छात्र, श्री के. यशवंत साई शामिल थे।

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ResearchAndMarkets.com की India Electric Scooter and Motorcycle Market Research Report के अनुसार, भारत का बिजली से चलने वाले स्कूटर और मोटरसाइकिल का बाज़ार वर्ष 2025 के अंत तक 10.8 लाख इकाईयों की बिक्री तक पहुँच जायेगा, जो 2020 और 2025 के बीच 57.9% की सी.ए.जी.आर. प्रदर्शित करेगा। रिटेल बिक्री के महत्व के मामले में, इस बाज़ार के 2020 से 2025 तक 63.9% की सी.ए.जी.आर. से अग्रसर होने और 2025 में 1.0 बिलियन डॉलर से अधिक का राजस्व प्राप्त करने का अनुमान लगाया गया है। सरकार द्वारा बिजली से चलने वाली गाड़ियों पर प्रदान किया जाने वाले लाभप्रद वित्तीय प्रोत्साहन और सब्सिडी का प्रावधान इस बाज़ार के विकास को प्रोत्साहित करने वाली एक प्रमुख बात है। बढ़ते हुए प्रदूषण और सरकार द्वारा वित्तीय प्रोत्साहन प्रदान करने के बढ़ते प्रावधानों के कारण भारत में बिजली से चलने वाले स्कूटरों और मोटरसाइकिलों की बिक्री तेज़ी से बढ़ रही है। 2019 में, देश में इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिलों और स्कूटरों की लगभग 1.52 लाख इकाईयाँ बेची गईं थी और 2014 के बाद से 20.6% की वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई थी।

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