सेना के शौर्य पर सवाल क्यों?

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Publish Date:13-03-2019 12:00:07am (IST)

दिनेश वर्मा , यह देश है वीर जवानों का अलबेलों का मस्तानों का इस देश का यारों क्या कहना यह देश है दुनिया का गहना.... ये गीत जहाँ पुरे शरीर में रोमांच पैदा करता है, सीना गर्व से चौड़ा हो जाता है.. देश के वीर सपूतों पर अभिमान होता है है वही, अपने देश में कुछ लोग सेना का शौर्य पर सवाल खड़ा कर रहे हैं. हालांकि इस देश ने सियासत के कई दौर देखे लेकिन जो सियासत आज दिख रही है वो इस लोकतंत्र के लिए ख़तरनाक है क्योंकि सेना के दम पर ही ये देश सुरक्षित है और नेता अपनी सियासत चमकाते हैं. लेकिन कुछ नेता हमारी सेना के शौर्य पर सवाल उठाकर राजनीतिक रोटियां सेंकने में लगे हैं. क्योंकि पूरी दुनिया को भारत के दावे पर भरोसा है. पूरी दुनिया इस वक्त हमारे देश के साथ खड़ी है लेकिन नेता बंट गए हैं. सत्ताधारी दल जहां इस कार्रवाई का श्रेय लेने में सबसे आगे है वहीं विपक्ष भी कार्रवाई के सबूत मांगने में पीछे नहीं है। यह सियासी दृश्य चिंताजनक है। सेना के शौर्य पर सियासत क्यों हो रही है? यह सही है कि सियासत की नींव में सिर्फ अपना नफा-नुकसान ही होता है लेकिन, नेता भूल गए हैं कि मुद्दा यहां सियासी गुणा-भाग का नहीं बल्कि राष्ट्र की सुरक्षा का है। एयर स्ट्राइक के सबूत सबसे पहले विपक्ष ने मांगे। कांग्रेस सहित समूचा विपक्ष सबूत मांगने के लिए सरकार पर टूट पड़ा। मिग-21 जैसे हमारे हवाई जहाजों की क्षमता पर भी सवाल खड़े किए गए। वहीं सरकारी दल के जवाब से भी विवाद और बढ़ गया। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने उत्साह में आकर सेना और सरकार से पहले ही बालाकोट में मारे गए आतंकियों की गिनती भी कर दी। जाहिर है कि यह सबकुछ देश के लिए नुकसान पहुंचाने वाला है। दिग्विजय सिंह कह रहे हैं, जैसे अमेरिका ने ओसामा को मार कर सबूत दिया, वैसे भारत सरकार भी सबूत दे. सिद्धू कह रहे हैं कि सेना ने आतंकी मार गिराए या फिर पेड़ों को मार गिराया. अरविंद केजरीवाल से लेकर ममता बनर्जी तक सब सवाल उठा रहे हैं. कह रह हैं कि हमें सबूत दो. पक्ष-विपक्ष अपने-अपने नफा-नुकसान के हिसाब से सेना के शौर्य को आंक रहा है, जो खतरनाक है। देश इस समय आम चुनाव की दहलीज पर खड़ा है। ऐसा लग रहा है कि सत्ता पाने की हसरत ने सारी सीमाएं तोड़ दी हैं। सेना की कार्रवाई पूरे देश का गौरव है, उपलब्धि है, न कि किसी एक दल की। वायु सेना खुद कह रही है कि उसका काम लक्ष्य भेदना है, लाशें गिनना नहीं लेकिन, हमारे नेता मारे गए आतंकियों की संख्या मांगने और देने में ही लगे हुए हैं। उरी के सैन्य ठिकाने पर आतंकी हमले के बाद भी पाक में हमारी सेना ने सर्जिकल स्ट्राइक की थी, जिसके सबूत बाद में सार्वजनिक कर भी दिए गए। ऐसे में अब विपक्ष को एयर स्ट्राइक के सबूत मांगने की ऐसी जल्दी क्यों है? क्या सबूतों पर ही चुनावी समीकरण टिके हुए हैं? भारतीय सेना के शौर्य की दुनिया कायल है। लेकिन राजनीति अगर सेना का इस्तेमाल चुनावी हथियार के तौर पर करे तो यह अपराध है। सेना के शौर्य पर यह सियासत बंद होनी ही चाहिए। नहीं तो ये देश सब देख रहा है. जिस दिन इस देश के लोगों का गुस्सा फूटा उस दिन इस देश राजनीतिज्ञों का क्या हश्र होगा ये सोच से परे है. ये बेशर्म नेता ये भी नहीं सोचते कि जिस परिवार ने अपना बीटा, पति, पिता और भाई खोया उसे इस गन्दी सियासत से कितनी तकलीफ पहुँचती होगी कि जो वीर जवान देश के लिए शहीद हो गया आज उसी देश के लोग उसके शौर्य पर सवाल उठा रहे हैं..

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