डीएचएफएल पर फंड डाइवर्जन के आरोप, सिन्हा ने की जांच की मांग

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Publish Date: (IST)

नई दिल्ली। पूर्व वित्त मंत्री और भाजपा नेता यशवंत सिन्हा ने गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनी डीएचएफल पर लगे 31,000 करोड़ रुपये की वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों की जांच की मांग की है। कंपनी पर आरोप है कि उसने सरकारी बैंकों जैसे एसबीआइ और बैंक ऑफ बड़ौदा से कर्ज लेकर उसका इस्तेमाल दूसरे कार्यो के लिए किया। हालांकि डीएचएफएल ने इन आरोपों को राजनीति से प्रेरित करार दिया है। इस बीच, डीएचएफएल का शेयर 8.01 फीसद गिरकर 170.05 रुपये रह गया। कंपनी पर आरोप लगने और उसका मुनाफा 36.7 फीसद घटने के चलते इसके शेयर गिरावट आई। मंगलवार को कंपनी पर वित्तीय अनियमितताएं बरतने का आरोप लगाया गया है। आरोप है कि डीएचएफएल ने 97000 करोड़ रुपये के कुल बैंक लोन में से 31000 करोड़ रुपये का इस्तेमाल मुखौटा कंपनियों कर्ज देने में किया। इस आरोप के बाद सिन्हा ने कहा कि सरकार कंपनी पर लग रहे विभिन्न आरोपों की जांच का आदेश तत्काल जारी नहीं करती तो इससे सरकार की नीयत पर सवाल खड़े होंगे। इसलिए वह अदालत की निगरानी में एक विशेष जांच दल से इसकी जांच कराने की मांग करते हैं। डीएचएफएल ने एक बयान जारी कर कहा है कि कंपनी शेयर बाजार में सूचीबद्ध हाउसिंग फाइनेंस कंपनी है और यह सेबी तथा नेशनल हाउसिंग बैंक और अन्य नियामकों के नियमों का पालन करती है। कंपनी का कहना है कि उस पर लगाए गए सभी आरोप दुर्भावना से प्रेरित हैं और इनका इरादा डीएचएफएल की साख को ठेस पहुंचाना है। कंपनी ने कहा कि इस कवायद का मुख्य उद्देश्य कंपनी को अस्थिर करना और बाजार में असंतुलन पैदा करना है ताकि कंपनी अपनी मौजूदा जिम्मेदारियों को पूरा न कर सके।

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