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जीव और ब्रह्म के मिलन को ही महारास कहते हैं – आचार्य मनमोहन मिश्र

बरहज ,देवरिया। रुद्रपुर तहसील क्षेत्र के अंतर्गत मदनपुर के करौंदी ग्राम में चल रहे श्रीमद् भागवत कथा के सप्तम दिवस पर आचार्य मनमोहन मिश्र ने भागवत कथा श्रवण कराए, उन्होंने कहा जब गोपी रूपी जीव के अविद्या रूपी वस्त्र का हरण कृष्ण रूपी ब्रह्म करते हैं इस समय जीव और ब्रह्म का मिलन होता है उसे ही महारास कहते हैं। शरद पूर्णिमा के रात्रि में कालिंदी के तट पर वृंदावन में भगवान श्री कृष्ण गोपियों के साथ महारास की। स्वयं भगवान शंकर भी रास में गोपी बनकर आए,इसलिए वृंदावन में आज भी शंकर भगवान को गोपेश्वर भगवान के रूप में पूजा जाता है। पुनः भगवान श्री कृष्ण ने मथुरा में अक्रूर जी के साथ जाकर कंस का वध किया एवं अपने नाना उग्रसेन को राजा बनाया। भगवान श्री कृष्ण का यज्ञोपवीत संस्कार हुआ और मथुरा से उज्जैन महर्षि सांदीपनि के आश्रम पर शिक्षा ग्रहण करने के लिए गए। और कम समय में ही सभी विद्याओं को सीख कर पुनः मथुरा आए। उन्होंने कहा भारतीय संस्कृति की रक्षा के लिए संस्कृत भाषा का संरक्षण एवं संवर्धन आवश्यक है जिससे बालकों के अंदर भारतीय सभ्यता का ज्ञान और संस्कार आएगा उससे हमारे सनातन संस्कृति का उत्तरोत्तर विकास होता जाएगा ।उक्त अवसर पर अवधेश दीक्षित ,सत्यम मिश्रा, राम प्रभाव पांडे, संजय पांडे, सुधीर पांडे, राहुल मिश्रा, धनेश पांडे, सहित काफी संख्या में श्रद्धालु जन उपस्थित रहे।

TFOI Web Team

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