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मैत्री थाई परियोजना के माध्यम से थाईलैंड के उपासंका द्वारा भारतीयों के लिए 31 एम्बुलेंस का दान!

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रिपोर्ट : के . रवि ( दादा ) ,,

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कोरोना संकट के मद्देनज़र थाईलैंड के आदरणीय भंते अजहां जयसरो और उनके थाई बौद्ध भक्तों ने महाराष्ट्र के डॉ. हर्षदीप कांबले (आईएएस) और रोजना कांबले के सहयोग से भारत को 31 एंबुलेंस दान की हैं.
आज महाराष्ट्र के पुणे में टाटा मोटर्स में भिक्षुओं के एक समूह की उपस्थिति में एम्बुलेंस का उद्घाटन किया गया . इस बहुत ही प्रेरक कार्यक्रम में थाईलैंड के महावाणिज्य दूतावास श्री सिरीकुल ने भी भाग लिया .

भगवान बुद्ध उपदेश देते हुए कहते हैं कि जो प्रत्ययसमुत्पाद जानता है वह धम्म को जानता है, निश्चय ही यह संसार एक दूसरे पर आश्रित है . भगवान बुद्ध दान को बहुत महत्व देते हैं, एक ऐसी शिक्षा जो पूरी मानव जाति को प्रेरित करती है .

जब भारत में कोरोना की दूसरी लहर अपने चरम पर थी, तबवीथाई बौद्ध भक्तों ने दुख, दर्द और चिंता से पीड़ित भारतीयों की मदद के लिए हाथ बढ़ाया. बुद्ध के शब्दों ‘संवेदनशीलता, परोपकार, मित्रता, समर्पण और करुणा’ का एक अनूठा संयोजन दोनों देशों के बीच की कड़ी बन गया. मैत्री थाई परियोजना के माध्यम से थाईलैंड के बौद्ध भक्तों ने थाईलैंड में थेरवाद वन परंपरा के एक श्रद्धेय भक्त अजहान जयसरो की चुनौती के जवाब में भारतीय लोगों को 31 एम्बुलेंस की अमूल्य सहायता प्रदान की है.

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मैत्री थाई परियोजना

भारत को यह सारी चिकित्सा सहायता डॉ. हर्षदीप कांबले, विकास आयुक्त, महाराष्ट्र के माध्यम से प्रदान की गई .
इनमें से ऑक्सीजन कंसेंटेटर और वेंटिलेटर पहले ही वितरित किए जा चुके हैं, जबकि 31 एम्बुलेंस का उद्घाटन समारोह आज पुणे में आयोजित किया गया. बोधगया, सारनाथ, राजगीर, कुशीनगर, लेह-लद्दाख, नागपुर, औरंगाबाद, बैंगलोर, दिल्ली समेत भारत के 31 जिलों में यह एंबुलेंस दान की जाएंगी.

यह सब संभव करने वाले आदरणीय भंते अजन जयसरो की ओर से तथा समस्त भारतीय जनता की ओर से थाईलैंड के बौद्ध भक्तों की ओर से हार्दिक धन्यवाद एवं शुभकामनाएं दीं गई हैं. वैसे देश के साथ साथ महाराष्ट्र में भी कई ऐसे बड़े अफसर है , जो चाहे तो खुद के परिवार के साथ साथ देश और राज्य के जरूरत मंदो की मदत कर सकते है , जैसे की आदरणीय हर्षदीप कांबले जी , जो की अपने राज्य का सरकारी काम तो बखूबी निभाते ही हैं , पर साथ ही धम्म के काम के साथ साथ समाज के हर तबके की मदत में भी वह इन दिनों अपनी धर्मपत्नी रोजाना कांबले जी के साथ मिलकर करते रहते है . पर यही काम यदि शेष सरकारी अफसर भी करे तो देश , राज्य और समाज की कुछ समयाओ से निजात पाया जा सकता है .

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