राज्य चुने

HomeStateसंस्कृत भाषा ही सनातन संस्कृति को चलाती है- पंडित गुलाब शंकर दूबे

संस्कृत भाषा ही सनातन संस्कृति को चलाती है- पंडित गुलाब शंकर दूबे

लेटेस्ट न्यूज़:

विज्ञापन

पंडित गुलाब शंकर दूबे ने संस्कृत के प्रचार प्रसार में बीता दी अपनी जिन्दगी

- Advertisement -

भदोही। समाज में जहां लोग पैसा और शोहरत पाने के लिए अपने हद तक चले जाते है। वही कुछ ऐसी भी शख्सियत है जो केवल समाज के उत्थान के लिए न केवल एक दो वर्ष बल्कि अपने जिन्दगी का सुनहरा दौर संस्कृत भाषा के प्रचार प्रसार में बीता दिया। और वह भी बिना किसी शुल्क लिए यानि अवैतनिक। और इस शख्सियत के कार्यों को देखकर मानव संसाधन विकास मंत्रालय भारत सरकार ने 45 वर्ष बाद सम्मानित किया। जो की संस्कृत के उत्थान के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया।
औराई क्षेत्र के समधा गांव निवासी पंडित गुलाब शंकर दूबे जो पांच भाइयों में दूसरे नंबर पर है। समाजसेवा और संस्कृत उत्थान का इतना नशा चढा कि स्नातक और आचार्य करने के बाद अवैतनिक शिक्षक के रूप में 45 वर्ष तक बच्चों को संस्कृत की शिक्षा दी। इतना ही नही पंडित गुलाब शंकर दूबे ने रघुवंश महाकाव्य और मेघदूतम् पर टीका भी लिखा लेकिन उसे प्रकाशित इसलिए नही कराये कि देश में और भी संस्कृत के विद्वान है। पंडित गुलाब शंकर दूबे ने औराई में स्थित एक इंटर कालेज में कुछ माह तक अध्यापक के तौर पर कार्य किया लेकिन संस्कृत भाषा के उत्थान को लेकर उनकी दीवानगी ज्यादा देर तक उन्हे वहां रोक न सकी। फिर अपने गुरू के आदेश के बाद रोही में स्थित एक ब्रिटिश कालीन विद्यालय में अवैतनिक अतिथि अध्यापक के रूप में कार्य प्रारंभ किया। जो पिछले वर्ष तक चलता रहा। पंडित गुलाब शंकर के कार्यो को देखकर मानव संसाधन विकास मंत्रालय भारत सरकार ने उनको सम्मानित किया और आजीवन पेंशन की व्यवस्था की। पंडित गुलाब शंकर दूबे के दो बेटे है जिसमें से एक राजनीतिक क्षेत्र में है और दुसरा बेटा मेडिकल क्षेत्र में है।
पंडित गुलाब शंकर दूबे ने बताया कि मैने अपने समय में अवैतनिक कार्य किया लेकिन आज के समय में अवैतनिक कार्य करना लोगो के लिए भारी पडे़गा क्योकि परिवार के सहयोग से मैने ऐसा किया। और ऐसा करना आज के समय में लोगों के लिए संभव नही है और पारिवारिक जिम्मेदारी की वजह से उचित भी नही है। लेकिन लोग संस्कृत के उत्थान में लोग आगे आये। सरकार से भी मांग की कि संस्कृत भाषा के उत्थान में सरकार प्रयास करे। और सभी लोग संस्कृत पढे और संस्कृत के प्रचार प्रसार में अहम भूमिका निभाये। कहा कि संस्कृत से सनातन संस्कृति को मजबूत बनाने में सहायता मिलेगी। इसलिए आम जन और सरकार संस्कृत भाषा के उत्थान के लिए अपने स्तर से बेहतर करने का प्रयास करे। पंडित गुलाब शंकर ने कहा कि गुरूजी की प्रेरणा पर स्नातक करने के बाद आचार्य किया फिर मैने संस्कृत पर टीका भी लिखा लेकिन प्रकाशित नही कराया। कहा कि परिवार और माता-पिता के सहयोग और प्रोत्साहन से मै सामाजिक कार्य और संस्कृत के लिए कार्य किया। और ऐसा संभव इसलिए हुआ कि संस्कृत में मेरा काफी लगाव रहा और मै संस्कृत भाषा को और जनमानस तक कैसे सहज रूप से पहुंचाया जाये इस पर विचार करता रहा। और आज सरकार ने जो सम्मान दिया उसके लिए आभार। और आगे भी संस्कृत भाषा के लिए बेहतर कार्य करने वालों को सम्मानित करती रहे सरकारे जिससे लोग और बेहतर कार्य कर सके।
पंडित गुलाब शंकर दूबे ने कहा कि माता-पिता की सेवा करने तथा घर पर रहकर सामाजिक सेवा करने की वजह से औराई के एक कालेज से अध्यापन छोड़ना पड़ा क्योकि उस समय भाई पढ रहे थे माता-पिता की देखभाल मे दिक्कत हो रही थी इसलिए माता-पिता की सेवा अध्यापन करने से बेहतर सोचा और अध्यापन छोड़ दिया। लेकिन फिर गुरूजी की प्रेरणा से अवैतनिक अध्यापन प्रारंभ किया। पंडित गुलाब शंकर दूबे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से भी जुडे है। उन्होंने कहा कि इससे जुडने से लोगो में राष्ट्रीयता की भावना मजबूत होती है, जातिपात की भावना से दूर होती है। कहा कि कुछ लोग राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को कट्टर मानते है वह गलत है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ मानवता और राष्ट्रीयता को लेकर चलती है। सनातन धर्म बिना संस्कृत के चल नही सकता है। संस्कृत ही संस्कृति को चलाती है। कहा कि सभी धर्मों का सम्मान है लेकिन बच्चों को कही भी पढाये लेकिन सनातन संस्कृति और संस्कार पर अभिभावक विशेष ध्यान दें। क्योकि जब संस्कार ठीक नही रहेगा तो सारी शिक्षा बेकार है। इसलिए सनातन संस्कृति और संस्कार को जीवन का अभिन्न अंग बनाना जरूरी है।

ट्रेंडिंग न्यूज़:

हमारे साथ जुड़े:

500FansLike
0FollowersFollow
500SubscribersSubscribe

यह भी देखे:

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here