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बच्चों की गिनती करके किसी को चुनाव, नौकरी और मूलभूत सुविधाओं से वंचित करना बहुत ही क्रूर और अमानवीय इरादा है- पंडित केशव कृपाल महाराज

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भदोही। जिले के वरिष्ठ पत्रकार और विद्वान पंडित केशव कृपाल महाराज ने सरकार द्वारा जनसंख्या को लेकर कानून बनाये जाने पर त्वरित टिप्पणी की है। और इस पर सामूहिक चेतना और शिक्षा के सहारे ही कम करने की बात कही।

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पंडित केशव कृपाल महाराज ने कहा कि बच्चों की गिनती करके किसी को चुनाव, नौकरी और मूलभूत सुविधाओं से वंचित करना बहुत ही क्रूर और अमानवीय इरादा है। जनसंख्या कम और नियंत्रित हो, इसके लिए सामूहिक चेतना और शिक्षा के सहारे ही काम करना ठीक है। अगर यह कानून अल्पसंख्यकों को लक्ष्य करके बनाया जा रहा है तो बड़ी भारी नादानी है। अस्सी प्रतिशत हिन्दू जिनके बच्चे मजदूरी और रोजगार के जरिये अपना और अपने परिवार का पेट भरते हैं, जिनके बेटे सेना और पुलिस में देश की रक्षा करते हुए अपना लहू बहाते हैं, खेतों में अपना पसीना गार कर देश के लिए अनाज पैदा करते हैं, ये सभी प्रभावित होंगे। ये सभी हिन्दू ही होंगे। तमाम हिन्दू संताने जो न तो सरकारी नौकरी करती हैं और न चुनाव लड़ना जानती हैं, निजी कंपनियों में काम करके, सड़कों पर कई उत्पादनों की बिक्री करके और पकौड़े तलकर अपने श्रम से देश के आर्थिक ढांचे को मजबूत करने के साथ स्वयं भी स्वाभिमान से जी रही हैं। इस श्रम शक्ति पर विराम लगाना कहाँ की बुद्धिमानी है? इस कानून से संजय गांधी की सनक की याद आती है, जब नसबंदी प्रमाणपत्र के बिना लोगों को सुविधाओं से मना कर दिया गया था। उसके ठीक बाद इन्दिरा गांधी का हस्र क्या हुआ था, यह भी सब को ज्ञात है। जनसंघ के नेता इसी मुद्दे के खिलाफ 1977 में सर्वदलीय सभा करते थे जिसमें शाही इमाम मौलाना बुखारी की बराबर शिरकत हुआ करती थी।
कहा कि जनसंख्या विधि को पूर्वकालिक(रेट्रोस्पेक्टिव) बनाकर ऐसे लोगों को भी निर्वाचन से च्युत कर दिया जाय जिनके बाप ने आधा दर्जन के करीब बच्चे पैदा किये थे. अगर इस कानून की चर्चा गंभीरता से हो रही है तो संभल जाना ठीक रहेगा। और यदि यह चुनावी झुनझुना है तो बता दूँ कि ऐसे खिलौनों से खेलते हुए जनता अब अभ्यस्त और सज्ञान हो चुकी है। उसे पता है कि चुनाव सिर पर होने के बाद क्या कुछ नहीं किया जाता। यह कानून हिंदुओं में ज्यादा खुशियां नहीं बाँट पाएगा। बस वही जनमानस खुशी में विह्वल होगा जो इस कानून के बिना भी आपको छोड़कर कहीं जाने वाला नहीं है। दूसरी ओर अभी मोहन भागवत ने अल्पसंख्यकों को जितना रिझाया है, उसपर पानी जरूर फिर जाएगा।
हाँ, एक फायदा इस कानून का जरूर होगा कि चुनाव और नौकरी के लिए अयोग्य होने के बाद जो सरप्लस पापुलेशन होगी वह पार्टियों के लिए झंडा उठाने, रैली में जाने और ट्वीट करने के लिए सस्ते दर पर मिल जाया करेगी।

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