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Dilip Kumar death News आजाद हुआ कोहिनूर

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विशेष रिपोर्ट : के . रवि ( दादा ) 

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Dilip Kumar death News : मुझे वह वक्त आज भी याद है की पत्रकारिता करते समय हमें कई अच्छे बुरे लोगो का सामना करना पड़ता था . उन दिनों में कौन सही हैं , कौन गलत हैं यह समझना थोड़ा मुश्किल हो था . उन्ही दिनों हमारी मुलाकात कई मर्तबा देश के डॉन हाजी मस्तान मिर्जा ही से उनके मुंबई के बंगले में हुवा करती थी . पर एक दिन के खाने के मौके पर मस्तान बावा के मुंह से यह बात निकली की वह स्वयं अभिनेता दिलीप कुमार को बहुत पसंद करते है , और उनके बंगले पे दिलीप कुमार जी का कूदी भी वक्त पी स्वागत हुवा करता था .थी बात शिव सेना के सुप्रीमो बालासाहेब ठाकरे जी के मातोश्री पर भी दिलीप कुमार साहब का बड़ी बेसब्री से इंतजार हुआ करता था .यह सब जिस महान अभिनेता के बारे में हुआ करता था उस हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता दिलीप कुमार का आज इंतकाल हो गया है. गौरतलब हो की उन्हें पिछले महीने से ही सांस संबंधित समस्याएं बनी हुई थी . जिसके चलते उन्हें मुंबई के हिंदुजा अस्पताल में भर्ती कराया गया था. यही पर आज 98 वर्षीय दिलीप कुमार ने मुंबई में आखिरी सांस ली .

Dilip Kumar death News

हिंदुजा अस्पताल के डॉ जलील पारकर के अनुसार दिलीप कुमार का बुधवार सुबह साढ़े सात बजे निधन हो गया. दिलीप साहब के साथ उनके दुःख सुख की संगिनी , उनकी बीवी , अभिनेत्री सायरा बानो उनके आखिरी सांस तक साथ रहीं. आज के इस 21 वी सदी के दौर में शायद ही पति के हर सुख दुख में आखिर तक साथ देने वाली बीवियां नसीब वालो को नसीब होती है .जो सायरा बानो जी ने दिलीप कुमार का खास ख्याल रखते हुए अपना गहरा फर्ज निभाया . इतना ही नहीं दिलीप कुमार कई सालो से बीमार थे,तब उनकी सलामती के लिए सायरा बानो जी उनके चाहतो से लगातार दुआ करने की अपील भी कर रही थीं. दिलीप कुमार की निधन की खबर से फिल्म इंडस्ट्री में मातम गया है . बॉलिवुड के साथ साथ राजनेता भी सोशल मीडिया से अपनी पोस्ट साझा कर अभिनेता को श्रद्धांजलि दे रहे हैं .

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गौरतलब हो की दिलीप कुमार को सांस में तकलीफ के कारण मुंबई के हिंदुजा अस्पताल में भर्ती कराया गया था . उस समय उनके फेफड़ों के बाहर तरल पदार्थ एकत्र हो गया, जिसे चिकित्सकों ने सफलतापूर्वक निकाल दिया था और पांच दिन बाद उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई थी. . पिछले साल, दिलीप कुमार ने अपने दो छोटे भाइयों असलम खान (88) और एहसान खान (90) को कोरोना वायरस के कारण खो दिया था . उसी दुःख के कारण उन्होंने अपना जन्मदिन और शादी की सालगिरह भी नहीं मनाई थी . हालांकि, सायरा बानो ने बताया था कि दोनों भाइयों के निधन की खबर दिलीप साहब को नहीं दी गई थी.

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अभिनेता दिलीप कुमार का जन्म 11 दिसंबर 1922 को पाकिस्तान में हुआ था और उनका पहला नाम यूसुफ खान था . बाद में उन्हें पर्दे पर दिलीप कुमार के नाम से बड़ी शोहरत मिली . उनका असली नाम एक निर्माता के कहने पर बदला था, जिसके बाद उन्हें स्क्रीन पर दिलीप कुमार के नाम से लोग जानने लगे. दिलीप कुमार की शुरुआती पढ़ाई महाराष्ट्र के नाशिक में हुई थी. बाद में उन्होंने फिल्मों में अभिनय का फैसला किया और 1944 में रिलीज हुई फिल्म ज्वार भाटा से उनका प्रवेश हुवा. शुरुआती फिल्में नहीं चलने के बाद अभिनेत्री नूर जहां के साथ उनकी जोड़ी हिट हो गई. फिल्म जुगनू दिलीप कुमार की पहली हिट फिल्म बनी . दिलीप साहब ने लगातार कई फिल्में हिट दी हैं . उनकी फिल्म मुगल-ए-आजम उस वक्त की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म बनी . अगस्त 1960 में रिलीज हुई यह फिल्म उस वक्त की सबसे महंगी लागत में बनने वाली फिल्म थी .

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अपनी आजादी को हम हर गिज मीठा सकते नही ,
सर कटा सकते है लेकिन सर झुका सकते नही .
यह गीत आज भी 15 अगस्त के दिन बड़े आदाब से सालो से गुनगुनाया जाता हैं .

दिलीप कुमार को आठ फिल्मफेयर अर्वाड मिल चुके हैं. माध्यमों के अनुसार सबसे ज्यादा अवॉर्ड जीतने के लिए दिलीप कुमार का नाम गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज है. दिलीप कुमार को साल 1991 में पद्म भूषण और 2015 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया . 1994 में दादा साहेब फालके अवॉर्ड से नवाजा गया. 2000 से 2006 तक वह राज्य सभा के सदस्य भी रहे. 1998 में वह पाकिस्तान के सर्वश्रेष्ठ नागरिक सम्मान निशान-ए-इम्तियाज से भी सम्मानित किए गए.

दिलीप कुमार साहब अभिनय शैली के मामले में एक ट्रेंडसेटर थे, और भारतीय सिनेमा की विभिन्न धाराओं में अभिनेताओं की पीढ़ियों को प्रेरित करते थे. भारत के अब तक के सबसे महान अभिनेताओं में से एक के रूप में माना जाता है, उनका करियर पांच प्रतिष्ठित दशकों में फैला है. भारत में सिनेमा के स्वर्ण युगो में से एक, उन्हें ख़ामोशी का मास्टर माना जाता था, और उन्होंने अभिनय के ज़ोरदार और नाटकीय तत्वों को बढ़ाया. देवदास, मुग़ल-ए-आज़म, गंगा जमुना, बैराग, राम और श्याम, नया दौर, मधुमती, क्रांति, विधाता, कर्मा शक्ति और मशाल जैसी उनकी कई प्रसिद्ध फ़िल्में हैं. दिलीप कुमार का जन्म पेशावर (वर्तमान पाकिस्तान) के किस्सा खवानी बाजार इलाके में आयशा बेगम और लाला गुलाम सरवर खान के घर हुआ था. उन्होंने 1944 की ज्वार भाटा के साथ फिल्मों में शुरुआत की, लेकिन फिल्म और उनके काम ने ज्यादा ध्यान आकर्षित नहीं किया .यह 1947 की जुगनू के साथ था, जिसमें नूरजहाँ ने भी अभिनय किया था, उन्होंने अपनी पहली बॉक्स ऑफिस हिट हासिल की. 1949 में, उन्होंने अंदाज़ में राज कपूर और नरगिस के साथ अभिनय किया, और यह वह फिल्म थी जिसने दिलीप कुमार को एक बड़ा स्टार बना दिया. वह 1954 में सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का फिल्मफेयर पुरस्कार जीतने वाले पहले अभिनेता थे, और उन्होंने इसे कुल 8 बार जीता .उन्होंने और शाहरुख खान ने संयुक्त रूप से सबसे अधिक फिल्मफेयर ट्रॉफी का रिकॉर्ड बनाया.

Dilip Kumar death News

आज राज्य सरकार के नियमो के अनुसार दिलीप कुमार साहब को बंदूकों के तोफे के साथ बांद्रा के उसी कब्रस्तान में सालमी देकर श्रद्धांजली दी गई जहां मोहम्मद रफी जी और मधुबाला जैसे देश के कई मशहूर कलाकारों की कब्र हैं . गौरतलब हो की दिलीप कुमार जी को मधुबाला से बहुत प्यार था .और आज मधुबाला जी के कब्र को लगकर ही दिलीप कुमार जी की कब्र बनाकर उनको अंतिम विदाई दी गई . दिलीप कुमार साहब का इस तरह जाना बॉलीवुड के कई कलाकारों को बहुत चोट पहुंचा गया , जिनमें अभनेता धर्मेंद्र जी भी फुट फुट कर रोते हुए नजर आए है . हम तमाम चाहतो और फिल्म इंडस्ट्री एवं माध्यमों की और से भी दिलीप कुमार साहब को दिली आदरांजलि अर्पित करते है .

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