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Monday, June 14, 2021

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बैंकों ने किए कोविड महामारी की दूसरी लहर के कारण उत्पन्न स्थितियों के असर को कम करने के प्रयास

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बैंकों ने किए कोविड महामारी की दूसरी लहर के कारण उत्पन्न
स्थितियों के असर को कम करने के प्रयास

संवाददाता (दिल्ली)- देश में कोविड- 19 की दूसरी लहर के कारण उत्पन्न स्थितियों के असर को कम करने के लिए सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने सामूहिक रूप से कदम उठाने की पहल की है। इसी सिलसिले में आज एक संयुक्त संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए श्री. दिनेश खारा, चेयरमैन, एसबीआई और श्री राजकिरण राय, चेयरमैन, आईबीए और श्री सुनील मेहता, चीफ एक्जीक्यूटिव आॅफिसर, आईबीए ने सार्वजनिक क्षेत्र के सभी बैंकों द्वारा नए ऋण उत्पादों को लॉन्च करने की घोषणा की। साथ ही उन्होंने बैंकों की ओर से शुरू किए गए विभिन्न सहायता उपायों की जानकारी भी दी। ये कदम देश में कोविड महामारी की दूसरी लहर के कारण उत्पन्न स्थितियों के असर को कम करने के लिहाज से उठाए गए हैं।

वित्त वर्ष 2021 की चैथी तिमाही की शुरुआत अच्छे स्तर पर हुई थी और बेहतर शुरुआत के बाद अर्थव्यवस्था फिर से पुनर्जीवित होने लगी थी। लेकिन अप्रेल, 2021 में फैले कोविड- 19 के कारण आम लोगों के जीवन के साथ-साथ कारोबारों पर भी बुरा असर पड़ा और इन स्थितियों ने एमएसएमई के नकदी प्रवाह को भी प्रभावित किया है।

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कोविड महामारी के कारण उत्पन्न व्यवधानों के असर को दूर करने और अर्थव्यवस्था के पुनरुत्थान के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने दिनांक 05.05.2021 के अनेक उपायों की घोषणा की है, जैसे कि-
ऽ आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं (कोविड लोन बुक) तक आसान पहुंच के लिए ₹50,000 करोड़ की टर्म लिक्विडिटी सुविधा
ऽ व्यक्तियों, छोटे व्यवसायों और एमएसएमई की कोविड संबंधित तनावग्रस्त संपत्तियों के लिए समाधान फ्रेमवर्क 2.0
ऽ कार्यशील पूंजी सीमा आदि का पुनर्मूल्यांकन।

इसके अलावा, भारत सरकार ने एमएसएमई को सहायता प्रदान करने, उनकी आजीविका की रक्षा करने और व्यावसायिक गतिविधियों को फिर से शुरू करने में मदद करने और महत्वपूर्ण स्वास्थ्य सुविधाओं को वित्तीय सुविधाएं देने के लिए अत्यंत सफल ईसीएलजीएस योजना में संशोधन की घोषणा की है।

सरकार ने ईसीएलजीएस का दायरा भी बढ़ाया है। भारत सरकार के वित्तीय सेवा विभाग ने आज ₹2 करोड़ तक के ऋणों के लिए एनसीजीटीसी द्वारा 100 प्रतिशत गारंटी कवर के साथ विस्तारित ईसीएलजीएस 4.0 की रूपरेखा की घोषणा की है। यह ऋण अस्पतालों, नर्सिंग होम, क्लीनिकों को साइट पर ऑक्सीजन उत्पादन संयंत्र स्थापित करने के लिए प्रदान किया जाएगा।

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ईसीएलजीएस की वैधता 30.09.2021 तक बढ़ा दी गई है। योजना के तहत 31.12.2021 तक संवितरण की अनुमति है।

संचालन संबंधी दिशानिर्देश एनसीजीटीसी द्वारा जारी किए जाएंगे।

उपरोक्त स्थितियों की पृष्ठभूमि में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक इन दायित्वों का निर्वहन करेंगे–
(ए) विस्तारित ईसीएलजीएस उपायों को लागू करना
(बी) लोगों को कोविड उपचार के खर्च को पूरा करने के लिए और व्यावसायिक संस्थाओं को स्वास्थ्य सेवा के बुनियादी ढांचे में सुधार के लिए ऋण उत्पाद उपलब्ध कराना
(सी) आरबीआई के रिजाॅल्यूशन फ्रेमवर्क 2.0 के निर्बाध कार्यान्वयन के लिए सिस्टम और प्रक्रियाएं स्थापित करना

बैंकों से अपेक्षा की जाती है कि वे आरबीआई के दिशानिर्देशों के तहत एक कोविड ऋण पुस्तिका तैयार करेंगे।
इसी के अनुरूप टीका निर्माताओं, अस्पतालों/औषधालयों, पैथोलॉजी प्रयोगशालाओं, निर्माताओं और ऑक्सीजन के आपूर्तिकर्ताओं, वेंटिलेटर, टीकों के आयातकों और कोविड से संबंधित दवाओं की लाॅजिस्टिक से जुड़ी फर्मों और रोगियों को इलाज के लिए ऋण सहायता प्रदान करने के लिहाज से 3 नए प्रोडक्ट्स को डिजाइन किया गया है।

1. ईसीजीएलएस के तहत ऑक्सीजन प्लांट स्थापित करने के लिए हेल्थकेयर बिजनेस लोन। ऑक्सीजन संयंत्र की स्थापना के लिए अस्पतालों, नर्सिंग होमों के लिए ₹2 करोड़ तक का ऋण 7.5 प्रतिशत की दर से, ईसीएलजीएस 4.0 के तहत एनसीजीटीसी के 100 प्रतिशत गारंटी कवर द्वारा समर्थित।
2. स्वास्थ्य देखभाल सुविधाओं के लिए ₹100 करोड़ तक के व्यावसायिक ऋण स्वास्थ्य देखभाल के बुनियादी ढांचे की स्थापना/विस्तार और स्वास्थ्य उत्पादों के निर्माताओं के लिए
3. कोविड के इलाज के लिए वेतनभोगी, गैर-वेतनभोगी और पेंशनभोगियों के लिए व्यक्तियों को ₹25000 से ₹5 लाख तक का असुरक्षित व्यक्तिगत ऋण।
उपरोक्त सभी योजनाएं सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों द्वारा रियायती ब्याज दरों पर पेश की जा रही हैं और यह कोविड ऋण पुस्तिका का हिस्सा बनेंगी।

रिजाॅल्यूशन फ्रेमवर्क 2.0 के संबंध में, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने ऋणों की पुनर्रचना के लिए टेम्प्लेटेड एप्रोच को तैयार किया है।
बिजनेस लोन-तीन श्रेणियां

1. ₹10 लाख तक – कुछ छोटे व्यवसायों और एमएसएमई के लिए स्टैंडडाइज्ड रिस्ट्रक्चरिंग आॅफर
2..₹10 लाख से अधिक और ₹10 करोड़ तक
3. ₹10 करोड़ से अधिक

व्यक्तियों को ऋण

प्रभावी तरीके से निर्बाध कार्यान्वयन के लिए, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक रणनीतिक दृष्टिकोण के साथ सामने आए हैं।
ऽ स्टैंडर्ड टेम्पलेट, पोर्टल और शाखा आधारित दृष्टिकोण।
ऽ पुनर्गठन के लिए श्रेणीबद्ध दृष्टिकोण
ऽ मानक आवेदन और मूल्यांकन प्रारूप
ऽ मानक और सरलीकृत दस्तावेजीकरण
ऽ काॅमन आउटरीच एप्रोच

सभी सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों द्वारा एक साथ आने और आज घोषित की गई उपरोक्त पहल सभी प्रभावित क्षेत्रों के उधारकर्ताओं पर कोविड की दूसरी लहर के कारण पड़े वित्तीय प्रभाव को कम करने के लिए सही दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

एसबीआई के चेयरमैन, आईबीए के चेयरमैन और सीईओ, आईबीए ने विभिन्न आउटरीच पहलों और बैंकों द्वारा उठाए गए नए कदमों के बारे में भी जानकारी दी। ये कदम आरबीआई के रिजाॅल्यूशन फ्रेमवर्क 2.0 के तहत व्यक्तियों, व्यवसायों और एमएसएमई द्वारा लिए गए ऋणों के पुनर्गठन के लिए सभी पात्र ग्राहकों तक पहुंचने के लिहाज से उठाए गए हैं।

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