महात्मा गांधी की सोच थी राष्ट्रीय सेवा योजना को गठित करने की

Updated: 13/03/2024 at 12:10 PM
Mahatma Gandhi's thinking was national

बांसी । स्थानीय रतन सेन डिग्री काॅलेज में राष्ट्रीय सेवा योजना के सात दिवसीय विशेष शिविर का उद्घाटन हुआ। कार्यक्रम का उद्घाटन माँ सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण व दीप प्रज्ज्वलन से हुआ स्वयंसेवक/स्वयंसेविकाओं ने अतिथियों का स्वागत, स्वागत गीत से किया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में महाविद्यालय के पूर्व प्राचार्य कालिका प्रसाद त्रिपाठी रहे। मुख्य अतिथि का स्वागत भाषण राष्ट्रिय कैडेट कोर अधिकारी डाॅ0 राजेश कुमार यादव ने किया। मुख्य अतिथि ने अपने उद्बोधन में कहा कि राष्ट्रीय सेवा योजना देश के युवाओं में व्यक्तित्व विकास करने के लिए युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय द्वारा आयोजित किया जाता है। यह हर साल 24 सितंबर को मनाया जाता है। राष्ट्रीय सेवा योजना की स्थापना 24 सितम्बर सन् 1969 को कि गई थी। इस संगठन की स्थापना की बात आजादी पूर्व से दिवगंत राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के समय से चल रही थी , जिसे अन्तिम रूप 1969 में दिया गया। इस दिन आयोजित गतिविधियों में भाग लेने वाले विद्यार्थी समाज के हर वर्ग के लोगों के साथ मिलकर समाज के हित के लिए कार्य करते है। महाविद्यालय के प्राचार्य डाॅ0 संतोष कुमार सिंह ने बताया कि सभी देशों के निर्माण में युवाओं का सबसे बड़ा योगदान होता है। आज हमारे देश में करीब 65 फीसदी जनसंख्या युवाओ कि है। जिनके कंधों पर ही देश की जिम्मेदारी है और ये युवा देश के विकास में अपनी भूमिका बखूबी निभा भी रहे हैं। देश निर्माण में युवाओं की भूमिका बढ़ाने और उन्हें देश के साथ जोड़ने का सबसे पहला प्रयास महात्मा गांधी ने आजादी के पहले ही शुरू कर दिया था। आजादी के समय गांधी जी ने युवाओं को राष्ट्रीय सेवा योजना से जोड़ने पर विशेष बल दिया था। आजादी के बाद एस राधाकृष्णन की अध्यक्षता में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने शैक्षिक संस्थानों में स्वैच्छिक राष्ट्रीय सेवा शुरू करने की सिफारिश की थी। इस पर केंद्रीय शिक्षा सलाहकार बोर्ड ने जनवरी 1950 में अपनी बैठक में विचार किया।
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जबकि 2 वर्ष बाद भारत सरकार ने पंचवर्षीय योजना के तहत 1 वर्ष छात्रों के सामाजिक एवं श्रम सेवा पर बल दिया। राष्ट्रीय सेवा योजना की कार्यक्रम अधिकारी डाॅ0 सुनीता त्रिपाठी ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि राष्ट्रीय सेवा योजना के आदर्श वाक्य ‘‘मैं नहीं बल्कि आप से प्रारम्भ की उन्होंने कहा कि एनएसएस का आदर्श वाक्य लोकतांत्रिक जीवन के सार को दर्शाता है और निःस्वार्थ सेवा की आवश्यकता को पुष्ट करता है। एनएसएस छात्रों के विकास और दूसरे व्यक्ति के दृष्टिकोण की सराहना करने में मदद करता है और अन्य जीवित प्राणियों के प्रति विचार भी दिखाता है। लोकतांत्रिक जीवन के सार को दर्शाता है और निःस्वार्थ सेवा की आवश्यकता को पुष्ट करता है। एनएसएस छात्रों के विकास और दूसरे व्यक्ति के दृष्टिकोण की सराहना करने में मदद करता है और अन्य जीवित प्राणियों के प्रति विचार भी दिखाता है। कार्यक्रम में मंच संचालन राष्ट्रीय सेवा योजना के कार्यक्रम अधिकारी डाॅ0 विनोद कुमार ने किया कार्यक्रम में स्वयंसेवक/स्वयंसेविकायें श्रेया, निधि, प्रीति, सुधा, आयशा, विचित सेन, बीनू, प्रियांशु ने गीत, भाषण प्रस्तुत किये कार्यक्रम में प्रमुख रूप से डाॅ0देवराज सिंह, डाॅ0 अरविन्द त्रिपाठी, डाॅ0 आलोक दूबे, डाॅ0 रविरेश सिंह, डाॅ0 मनीष भारती, रवीन्द्र कुमार टण्डन रवि , आशुतोष नाथ वर्मा, श्रीमती सपना त्रिपाठी, डाॅ0 केदार नाथ गुप्ता, यतीन्द्र नाथ मिश्र, सौरभकुमार , राम प्रसाद यादव, सौरभ प्रताप सिंह, नन्द कुमार दूबे, श्रीमती ज्ञानमती, मनोज कुमार आदि उपस्थित रहे।

First Published on: 13/03/2024 at 12:10 PM
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