राज्य चुने

HomeStateMaharashtraएमबीएमसी के सुविधाहीन टी.बी. विभाग से परेशानहाल मरीज!

एमबीएमसी के सुविधाहीन टी.बी. विभाग से परेशानहाल मरीज!

लेटेस्ट न्यूज़:

विज्ञापन

◾अब तक मुंबई स्थित अस्पतालों के चक्कर लगाते हैं टी.बी. के मरीज!
◾महिला टी.बी. पेसेंट के पति ने लगाया ‘पल्स’ जांच केंद्र पर धोखा देने और अभद्रता पूर्वक व्यवहार करने का आरोप!
◾मिरा-भाईंदर मनपा के आरोग्य विभाग के उच्चाधिकारियों से की लिखीत शिकायत!

- Advertisement -

◾श्रवण शर्मा / भाईंदर◾
कुछ समय पहले ही कोरोना के पीक आवर में मिरा-भाईंदर मनपा आयुक्त सहित आरोग्य विभाग के अधिकारी इस बात की दुहाई देते रहे कि, “यह महामारी का प्रकोप है, इसलिए अचानक से उचित संसाधन उपलब्ध नहीं है। शीघ्र ही स्थिति को काबू में कर लिया जाऐगा।” लेकिन वास्तविक स्थिति यह है कि एमबीएमसी अपनी अकर्मण्यता व नाकामी छुपाने की नाकाम कोशिश कर रही थी। सच्चाई यह है कि, उसके आरोग्य विभाग का वर्षों पुराना और महत्वपूर्ण टीबी (क्षयरोग) विभाग अभी भी साधनहीन है। इतना ही नहीं अन्य विभागों की तरह यह विभाग भी अव्यवस्था और भ्रष्टाचार में लिप्त नजर आता है।
आश्चर्य वाली बात यह है कि, टीबी मुक्त भारत के प्रचार में हजारों करोड रुपये खर्च करनेवाले देश की आर्थिक राजधानी मुंबई से सटे मिरा-भाईंदर शहर की लगभग 2 हजार करोड़ रुपये बजट वाली महानगरपालिका के आरोग्य विभाग के पास टीबी से संक्रमित मरीजों की जांच के उपकरण अथवा मशीनरी तक नहीं है। लोगों को प्राईवेट जांच केंद्रों में जांच कराने अथवा मुंबई के सरकारी अस्पतालों में जाना पडता है। इससे सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि, सालों से अनवरत चल रहे टी.बी. केंद्र की बदहाली के कारण मिरा-भाईंदर शहर के न जाने कितने टी.बी. मरीजों व उनके परिजनों को परेशानियों का सामना करना पड रहा होगा।

एमबीएमसी के सुविधाहीन टी.बी. विभाग से परेशानहाल मरीज!
नवघर क्षयरोग निवारण केंद्र के आरोग्य अधिकारी वहां आए टीबी के मरीजों को जांच करवाने के लिए मिरा-भाईंदर रोड स्थित “पल्स इमेजिंग प्राईवेट लिमिटेड” नामक जांच केंद्र भेज देते हैं। वहां मरीजों से कहा जाता है कि, मनपा से आए हो तो तीन हजार में रिपोर्ट मिल जाएगी।
नवघर आरोग्य केंद्र स्थित ‘डाट्स प्लस साईट’ (डी.आर. टी.बी.) में डाक्टरी सहायता लेनेवाली टी.बी. की बीमारी से ग्रस्त एक महिला पेसेंट को पेट में काफी तकलीफ होती है। डॉक्टर ने महिला को छाती व पेट की एडवांस तकनीक से जांच कराने के लिए उपरोक्त “पल्स इमेजिंग प्राईवेट लिमिटेड” में जाने के लिए कहा। महिला पेसेंट के पति को भी जांच केंद्र के कर्मचारी ने 3 हजार का खर्च बताया। जब जांच रिपोर्ट आई तो सिर्फ छाती की थी, पेट की नहीं। पूछने पर बताया गया कि, डॉक्टर की गलती है, जो लिखा था कर दिया। पेट की जांच के लिए और रकम की मांग की गई। अंततः मरीज के पति को 3 हजार खर्च करने के बावजूद अपनी बीमार पत्नी को लेकर मुंबई स्थित के.ई.एम. अस्पताल जाना पडा। ऐसे और भी अनेकों मामले होते होंगे, जो सामने नहीं आ पाते। ‘पल्स’ जांच केंद्र और आरोग्य विभाग के डॉक्टर्स की साठगांठ है या नहीं, यह जांच का विषय है।

एमबीएमसी के सुविधाहीन टी.बी. विभाग से परेशानहाल मरीज!
अब सवाल यह उठता है कि, ऐसे टी.बी. आरोग्य केंद्र चलाए जाने का क्या औचित्य है? जब साधन और संसाधन ही नहीं है तो, जनता के पैसों को लुटवाने के लिए इस विभाग की आखिरकार क्या आवश्यकता है? ऐसा शहर के प्रबुद्धजनों का कहना है। इस संबंध में महिला पेसेंट के पति रामफेर शुक्ला ने एमबीएमसी के आरोग्य विभाग के उच्चाधिकारियों को लिखीत शिकायत की है। फर्यादी रामफेर शुक्ला के अनुसार ‘पल्स’ जांच केंद्र पर धोखादेने एवं अभद्रता का आरोप है। अब देखने वाली बात यह है कि, एमबीएमसी का आरोग्य विभाग के उच्चाधिकारियों सहित आयुक्त दिलीप ढोले इस संदर्भ में संज्ञान लेते हैं या नहीं।

- Advertisement -

एमबीएमसी के सुविधाहीन टी.बी. विभाग से परेशानहाल मरीज!
शहर के प्रबुद्धजनों के अनुसार जिस महानगरपालिका का सालाना बजट 2 हजार करोड़ रुपए हो, वहां के टी.बी. मरीजों को मिलनेवाले इलाज को देखकर साफ अंदाजा लगाया जा सकता है कि, उपायुक्त संभाजी पानपट्टे ने पूरे आरोग्य विभाग का बंटाधार कर रखा है। सनद रहे कि, उपायुक्त पानपट्टे जानवरों के डॉक्टर होते हुए भी अपने राजनीतिक आकाओं की मेहरबानी से पूरे शहर के इंसानों के स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी पिछले अनेक वर्षों से सम्हाल रहे हैं! यह विभाग सदैव अव्यवस्था व भ्रष्टाचार के लिए चर्चा में रहा है। इस संदर्भ में शहर के लोगों ने स्थानीय नेताओं के प्रति भी नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि, शहर के टी.बी. केन्द्र की दुर्दशा के लिए ये लोग भी जिम्मेदार हैं। सभी को अपने-अपने स्तर पर प्रयास करके शीघ्रातिशीघ्र टी.बी. की बिमारी में होनेवाली जांच की मशीनों सहित सभी आवश्यक साधन उपलब्ध करवा कर सेंटर को साधन-संपन्न बनाने में सहयोग देना चाहिए ताकि यहां के मरीजों को ना तो ‘पल्स’ जैसे जांच केंद्रों के हाथों लुटना पडे और न ही मरीज को लेकर मुंबई के अस्पतालों के चक्कर लगाने पडें। ऐसी मांग समाजविदों ने की है।

ट्रेंडिंग न्यूज़:

हमारे साथ जुड़े:

500FansLike
0FollowersFollow
500SubscribersSubscribe

यह भी देखे:

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here