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Monday, June 21, 2021

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मानसिक शक्ति के लिए जड़ों से जुड़े रहें : संगीता काबरा

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मानसिक शक्ति के लिए जड़ों से जुड़े रहें : संगीता काबरा

हम कभी चिट्ठियों का इंतज़ार करते थे आज उन्ही चिट्ठियों की खुशबू को समझते हैं, सच्ची दोसती, सच्चा प्यार वक्त पर साथ देना, किसी की मदद के लिए आगे बढ़ कर आना यह सब सिखाया है कोरोना ने। यह सब कुछ नहीं बल्कि प्राकृतिक सोच है बिलकुल सच्ची और सादी और एक सुखद जीवन के लिए , हर परिस्थिति का सामना करने के लिए सशक्त सोच इन सबके लिए एक ही चीज़ काम आती है वह है प्राकृतिक सोच, जड़ों से जुड़े रहना, जीवन की छोटी छोटी खुशियों का आनंद उठाना । वैश्विक महामारी के दौरान मानव जाती को एक बहुत बड़ी शिक्षा प्राप्त हुई है और वह है प्राकृतिक सोच की । कोरोना से बचाव, लॉक डाउन, चिंता, मानसिक दबाव, यह सभी के जीवन का हिस्सा बन चुके हैं । वही कोरोना के दौर में खुश मिजाजी को ज़िंदा रख पा रही हैं जो सोच में प्राकृतिक बने हुए हैं ।

सोच प्राकृतिक का अर्थ है मूल भूत आदर्शों से जुड़े रहना,अपनी भाषा संस्कृति का प्रेम अनुभव करना, अपनी जड़ों से जुड़े रहना । इन सब को करने के लिए कोई विशेष अध्ययन नहीं करना पड़ता यह सभी भारतीय संस्कृति में प्राकृतिक रूप से शामिल हैं । जहाँ कभी यही छोटी छोटी चीज़ें कई युवाओं को पसंद नहीं आते थे आज यही छोटी छोटी चीज़ें जैसे बड़ों को प्रणाम करना, आदर सत्कार, दादी माँ के घरेलु नुस्खे, विभिन्न भारतीय भाषाओँ को जानना उनमे रूचि पैदा करना,भारत देश के महान इतिहास की गाथाएं जानना इन सबने हर उम्र और हर वर्ग के इंसान को इस वैश्विक महामारी में न केवल बंधे रखा है बल्कि जीना का सम्बल भी दिया है ।हम सभी ने यह इस दौर में समझा है की कला में रूचि मानसिक दबाव को काफी हद तक काम करती है और इसी दौरान लोगों ने भारतीय कलाओं को सीखा है जाना है और यहाँ तक की जिस प्रान्त या शहर की वह कला है वहां की भाषा वहां का खान-पान सभी रूचि का विषय बने हैं । प्राकृतिक बने रहिये कोरोना पर हमारी जीत निसंदेह पक्की है ।

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