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केंद्रीय वस्त्र मंत्री पीयूष गोयल ने वस्त्र क्षेत्र की नीतियों की समीक्षा की

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एमएसएमई और छोटे उद्यमियों को समर्थन देने के लिए विशेष मॉडल विकसित करने की आवश्यकता पर ध्यान केन्द्रित किया

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पीयूष गोयल ने हितधारकों से सभी निर्यात प्रोत्साहन परिषदों के जरिये वर्तमान निर्यात को दोगुना करने का आग्रह किया

उन उद्योगों को मज़बूत समर्थन देने के लिए वित्तीय साधन विकसित करना, जो सब्सिडी केंद्रित नहीं हैं और इन गारंटी के जरिये बैंकों से स्थायी ऋण प्रवाह को सक्षम बनाना : पियूष गोयल

रिपोर्ट : के.रवि ( दादा ),

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मुंबई : वस्त्र मंत्रालय का कार्यभार संभालने के बाद मंत्री . पीयूष गोयल ने वस्त्र क्षेत्र की योजनाओं और उनकी प्रगति की समीक्षा करने के लिए वस्त्र आयुक्त, मुंबई के कार्यालय का पहला दौरा किया तथा कार्यान्वयन में तेजी लाने के उपाय सुझाए दिए. मंत्री महोदय ने वस्त्र आयुक्त का कार्यालय, वस्त्र समिति, भारतीय कपास निगम लिमिटेड, निर्यात संवर्धन परिषदों और वस्त्र अनुसंधान संगठनों द्वारा नियोजित/कार्यान्वित की गई विभिन्न योजनाओं/गतिविधियों की समीक्षा की . इस बैठक में वस्त्र राज्य मंत्री श्रीमती. दर्शना जरदोश भी मौजूद थीं . यू. पी. सिंह, सचिव (वस्त्र) एवं अपर सचिव वी. के. सिंह वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से नई दिल्ली से बैठक में शामिल हुए .

वस्त्र मंत्री ने बातचीत के दौरान, विभिन्न सरकारी पहलों को लागू करने के उद्देश्य से अनुकूल माहौल बनाने के लिए सरकारी एजेंसियों और स्थानीय निर्वाचित प्रतिनिधियों के बीच बेहतर संपर्क और समन्वय की आवश्यकता पर जोर दिया . उन्होंने कहा कि सब्सिडी प्रदान की जाने वाली योजनाओं के तहत प्राप्त आवेदनों को प्रत्येक योजना के व्यापक उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए स्वचालित प्रक्रिया का उपयोग करके पारदर्शी तरीके से निपटाया जाना चाहिए . उन्होंने कहा कि एक ऐसी आवश्यक व्यवस्था तैयार की जानी चाहिए ताकि उद्योग और विभाग के अपने संपर्कों को समाप्त किया जा सके और प्रक्रिया को स्वतंत्र विवेकाधिकार से मानकीकृत किया जा सके . रिकॉर्ड किए गए कारणों के लिए एमएसएमई के वितरण की विशेष व्यवस्था बनाई जानी चाहिए . टीयूएफ योजना की प्रगति में तेजी लाने के लिए, उन्होंने सुझाव दिया कि प्रमुख समस्याओं को रेखांकित किया जाए और बैंकों सहित हितधारकों के साथ विचार-विमर्श किया जाए ताकि विवाद के मुद्दों को हमेशा के लिए एक ही बार में हल किया जा सके . उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि उद्योग के लिए वैधानिक रिटर्न जमा करने के प्रारूप को सरल बनाया जा सकता है . उन्होंने वस्त्र आयुक्त और वस्त्र समिति के कार्यालय के कर्मचारियों के तर्कसंगत और अधिकतम उपयोग पर बल दिया .

वस्त्र मंत्री पियूष गोयल ने कपास की उत्पादकता बढ़ाने की आवश्यकता और किसानों के कल्याण के लिए कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय के साथ उठाए जाने वाले आवश्यक कदमों पर प्रकाश डाला . भारतीय कपास निगम लिमिटेड, कपास उत्पादक किसानों को मुद्रा ऋण लेने के माध्यम से स्थापित स्टार्ट-अप्स द्वारा कपास तोड़ने की मशीन उपलब्ध कराने की संभावनाओं पर काम करेगा और छोटे किसानों को सहायता प्रदान करने के लिए विशेष मॉडल विकसित करेगा . पियूष गोयल ने वस्त्र क्षेत्र में बाल श्रम के उन्मूलन के मुद्दे पर जोर दिया और रणनीतिक योजना बनाने के लिए हितधारकों के साथ बैठक बुलाने का सुझाव दिया .

निर्यात प्रोत्साहन परिषदों की गतिविधियों की समीक्षा करते हुए, वस्त्र मंत्री ने देशोन्मुख विस्तृत व्यापार समझौतों के लिए बड़े स्तर पर उद्योग के पारस्परिक संवाद का सुझाव दिया . इसके अलावा, मंत्री ने उद्योगों की मदद के लिये ऐसे वित्तीय साधनों को विकसित करने को कहा जो सब्सिडी पर केंद्रित न हों और बैंक के जरिये गारंटी के साथ स्थायी ऋण प्रवाह को बनाए रखें .

केंद्रीय वस्त्र मंत्री पीयूष गोयल ने वस्त्र क्षेत्र की नीतियों की समीक्षा की

मंत्री पियूष गोयल ने भविष्य के हिसाब से मूल्य वर्धित उत्पादों के विकास और इनकी प्रदर्शनी की आवश्यकता पर भी जोर दिया . उन्होंने वैगन कवर के लिए टेक्निकल टेक्सटाइल को विकसित करने और नेशनल टेक्निकल टेक्सटाइल मिशन के अधिकतम इस्तेमाल की मदद से अपनी क्षमताओं को बढ़ाने और बाजार की जरूरतों को पूरा करने की भी सलाह दी . उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पश्मीना ऊन की ब्रांडिंग करने की आवश्यकता पर भी बल दिया . इसके अलावा, उन्होंने वस्त्र अनुसंधान संघों से सरकारी अनुदान पर निर्भर रहने के बजाय आत्मनिर्भर बनने का आग्रह किया .

बैठकों के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए मंत्री ने कहा कि वस्त्र क्षेत्र सबसे बड़ा रोजगार प्रदान करने वाला सेक्टर होने के साथ-साथ सबसे बड़ा निर्यातक भी है . उन्होंने कहा कि किसानों की आय दोगुनी करने, युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा करने और प्रत्येक भारतीय नागरिक को आत्मनिर्भर और स्वाभिमान भरा जीवन जीने में सक्षम बनाने के माननीय प्रधानमंत्री के दृष्टिकोण को पूरा करने में यह सेक्टर बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है .
गौरतलब हो की मुंबई शहर एक जमाने में टेक्सटाइल मिलो से भरा पड़ा था , जहां लाखों मिल मजदूर अपना परिवार का पेट पालते थे . पर आज ना वे मिल मजदूर रहे ना मिले ?
उन मिलो को और मजदूरों को भी कई यूनियन लिडरो ने अपने अपने मकसदो के लिए खाक कर दिया ,जहा आज मिल से मॉल का रूपांतर हो गया है .

क्या इस देश को कोई ऐसा भी मंत्री मिलेगा जो उन जमाने के मिल मजदूरों की रोनक फिर से ला पाएंगे .
और वैसे भी आदरणीय पियूष गोयल जी का उनके पापा वेदप्रकाश गोयल एवम् चंद्रकांता गोयल जी का सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में मुंबई से बड़ा योगदान है , तो क्या पियूष गोयल जी इस दिशा से कुछ तो रोशनिभरा कदम उठाएंगे क्या .

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