अस्थायी गौशाला मधुकरपुर चौबे में अव्यवस्थाओं का बोलबाला!

Updated: 10/10/2023 at 8:45 PM
गौशाला

दिवाकर उपाध्याय/भनवापुर/सिद्धार्थनगर

भनवापुर विकास खन्ड अन्तर्गत ग्राम पंचायत मधुकर पुर चौबे (डिवली डीहा चौबे) में अस्थाई गौशाला में अवस्थाएं हावी हैं देख-रेख, चारा -पानी की समुचित व्यवस्था नहीं होने से गौवंश बीमार हो रहे हैं और बीमारी से दम तोड़ रहे हैं इस समय एक गोवंश बीमार हैं उठ नहीं पा रहीं हैं उनके ऊपर प्लास्टिक डालकर उनको ढक दिया गया है और ग्रामीणों द्वारा बताया गया कि गौशाला का टीन शेड काफी समय से टूटा हुआ है यहाँ गौमाताओं की इतनी दुर्गति हो रही है जिस की कोई सीमा नहीं यहाँ 05-06 दिन पूर्व दो गोवंश की मौत हो चुकी है सबको ठेले पर लादकर दूर फेंकवा दिया गया यहाँ पर स्टोर मे टीन शेड से पानी टपकता है जिसके कारण भूसा सड़ गया है गौ वंशो के लिए हरे चारे की व्यवस्था नहीं है पशु आहार के नाम पर न तो चूनी- चोकर है और न ही किसी प्रकार का पशु आहार ही है बल्कि दिखाने के लिए महीनों पुराना ब्रान है धान का जिसमें घुन पड़ चुके हैं इसके अलावा और कुछ नहीं है.

सड़क पर घूम रहे गोवंशों को आसरा देने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अस्थाई गौशाला का संचालन कराया है सरकार की मंसा है कि नगर पंचायत/ ग्राम पंचायत की देख -रेख में गौशाला की देखभाल हो और उन्हें चारा- पानी समय से मुहैया हो इसके लिए बाकायदा बजट भी दिया जाता है लेकिन सरकार की मंसा पर पानी फेरा जा रहा है.भारत की जो संस्कृति है. वह गाय पर आधारित है यहां गायत्री समझकर इनकी उपासना की जाती है लेकिन आज पशु समझ करके गौ माता का तिरस्कार हो रहा है जबकि हमारे भारतीय संस्कृति की मूल हैं हमारे वेदों ,उपनिषदों, पुराणों में गौ माता की महिमा का वर्णन किया गया है और इस देश की संस्कृति का मूल आधार है हमारे ऋषि ,मुनियों ने गाय को गायत्री कहा है जब तक भारत में गाय को गौ माता के रूप में देखा जाता था तब तक भारत विश्व गुरु था तब तक भारत आर्थिक, सामाजिक, राजनीतिक, स्थित में विश्व का सिरमौर था लेकिन बाद में अंग्रेजों के प्रभाव में हमारे यहां गाय को पालतू पशु के रूप में देखा जाने लगा समस्या तभी से शुरू हुई गाय देवत्व प्रदान करने वाली हैं यदि गाय को हटा दें तो देवत्व नहीं रहेगा और समाज में आसुरीपन आ जाएगा जिस गौ माता के लिए भगवान ने 24 अवतार लिए जिन्हें चराने के लिए भगवान श्री कृष्ण नंगे पैर जंगल -जंगल गए जाया करते थे गौमाताओं के संरक्षण के लिए गौशालय तो बनाई जाती है लेकिन हाल ही में जो खबरें आई है वह काफी विचलित व हैरान करने वाली है गौ माता कैसे बचेंगी जिस प्रकार लोग अपने वृद्ध माता-पिता को वृद्ध आश्रम में छोड़ देते हैं और जो स्थिति उत्पन्न होती है ठीक उसी प्रकार गौ माता को गौशाला में भेजने पर वही स्थिति उत्पन्न होती है.

सचिव ग्राम पंचायत मधुकर पुर चौबे रणविजय यादव को फोन करने पर उन्होंने बताया कि अभी हम अस्पताल में हैं, इस सम्बन्ध में ज्यादा जानकारी के लिए खंड विकास अधिकारी भनवापुर आलोक दत्त उपाध्याय को फोन करने पर उन्होंने ने बताया कि हमने बिजिट किया है “मधुकर पुर चौबे गौशाला का” और वहाँ जो भी खामियां हैं शीघ्र ही सभी को दुरूस्त करवा दिया जायेगा।

First Published on: 10/10/2023 at 8:45 PM
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