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सुधाकर देशमुख जी का भिवंडी में जोरदार स्वागत

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रिपोर्ट : के . रवि ( दादा ) ,,

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सुधाकर देशमुख एक अध्ययनशील, मजबूत और दूरदर्शी प्रशासनिक अधिकारी हैं . इससे पहले भी कई लोगो ने उनके उल्हासनगर नगर निगम में प्रदर्शन को करीब से देखा और अनुभव किया है . कुछ लोग हकीकत के आमतौर पर किसी अधिकारी या विधायक, सांसद या मंत्री की सिफारिश नहीं करते . क्योंकि उनकी विश्वसनीयता पर भरोसा नहीं किया जा सकता . लोग कई अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को देखाते रहते है जो अपने पदों का गलत इस्तेमाल करते हैं और अनजाने में व्यवहार करते हैं, वे इतनी तेजी से रंग बदलते हैं कि एक गिलहरी भी शर्मिंदा होती हैं .
वैसे तो जब किसी भी खेमे में कोई अफसर तबातला पर आते है तो चाटुकार लोग उनके अलविदे के वक्त भी उनके लिए लिए गुलदस्ते, शॉल और उपहार लेकर जाते है .
यदि हम उल्हासनगर नगर निगम में आयुक्त के रूप में शामिल हुए सुधाकर देशमुख के लिए यह सब सोचे तो ऐसा उनके आगमन पर या यंजा से फिर कई और तबादले के वक्त करना बहुत ही शुभदाई हों सकता है . ऐसा स्वागत हम उन दिनों के उल्हासनगर के विट्ठलवाड़ी थाने के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक स्वर्गीय . अरुण पवार जिनके बारे में भी कर सकते हैं .
गौरतलब हो की उड़ी वह इकलौते साधारण पुलिस इंस्पेक्टर थे जिन्होंने उन दिनों अपने खुद के जान कि परवाह किए बिना किसी और लालच में गिरे बिना पप्पू कालानी को दादर के खोदादाद सर्कल करीब से बीच रात हिरासत में लिया था .

पर इन ब्यूरी पृष्ठभूमि के खिलाफ, सुधाकर देशमुख उल्हासनगर के आयुक्त के रूप में आए . तो उनकी पृष्ठभूमि को देखते हुए, तो आम लोगो को यकीन था कि वे उल्हासनगर के सांसदों और ठेकेदार लॉबी जैसे अनियंत्रित अधिकारियों पर लगाम लगाने में सक्षम होंगे . कुछ लोग उनका अभिवादन करने गया जरूर थे , पर वे अपने साथ कोई गुलदस्ता, शॉल, नारियल और उपहार का सामान नहीं ले गए थे . क्यों के आजकल का महान गुरु गूगल हैं . जिसके जरिए काफी कुछ लोगो को पता चलता है ,इन मिलने वालो में से कुछ लोगो ने सुधाकर देशमुख जी को की गुगल से प्रोफाइल पढ़ी थी , तभी वे समझ गए थे की यह सिर्फ कोई सुधाकर देशमुख ही नही बल्कि सुधारक देशमुख हैं . यहां तबादले के बाद उन्होंने न केवल ठेकेदार लॉबी को ठिकाने पर लाया बल्कि वित्तीय अनुशासन भी लगाया . वे एक प्रशासक के रूप में प्रभावी बने रहे . यहां के एक उपायुक्त के तीन तीन पदो की जिम्मेदारी भी सुधाकर देशमुख साहब ने तुरंत निकाल लिए . उल्हासनगर के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में लिखे जाने के लिए एक श्वेत पत्र जारी किया गया जिसका ध्यान से पालन किया गया . यह श्वेत पत्र इतना पारदर्शी और आर्थिक रूप से दिवालिया दर्शानेवाली है कि सुधाकर देशमुख का प्रशासन कौशल, आत्मीयता और शहर के प्रति दूरदर्शिता, दर्शाती है , जो कई ईमानदार लोगो ने जतन करके रखी है . सुधाकर देशमुख ने वह किया जो आज तक किसी कमिश्नर या जनप्रतिनिधि के लिए संभव नहीं था . सुधाकर देशमुख के कई कर्मो ने लोगो को उनका दीवाना बना दिया हैं . जब उल्हासनगर नगर निगम को कम से कम तीन साल से कमिश्नर की सख्त जरूरत थी, तो गोल्डन गैंग अचानक उनकी जगह लेने में सफल हो गया . म उल्हासनगर के लिए एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना हो सकती हैं .

आज भी अभी भी कई सामाजिक कार्यकर्ता चाहते है कि सुधाकर देशमुख जी उल्हासनगर नगर निगम के आयुक्त के रूप में वापस आएं . हालांकि यह संभव नहीं था, उन्हें अब उल्हासनगर के पास महाराष्ट्र के भिवंडी निजामपुर नगर निगम के आयुक्त के रूप में फिर से नियुक्त किया गया है.भले ही प्राजक्ता का पेड़ पास की बाड़ में हो, लेकिन उसकी खुशबू और सड़ांध पड़ोसी के दरवाजे पर पड़ रही हो, वही एहसास आज भी महसूस हो रहा है. वह भिवंडी आये है, इसलिए वह भिवंडी को बदल देंगे और प्रशासन में अनुशासन लाएंगे.

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भिवंडी निजामपुर नगर निगम के नागरिक वास्तव में भाग्यशाली हैं कि उन्हें सुधाकर देशमुख जैसा बहुत अनुभवी, दूरदर्शी और अनुशासित आयुक्त मिला. भिवंडी वासियों ने सुधाकर देशमुख जी के कौशल और अनुभव का लाभ उठाना चाहिए और सुधाकर देशमुख जी उल्हासनगर जैसे ही भिवंडी निजामपुर महापालिका में भी सुधारक देशमुख के रूप में प्रतिष्ठा प्रतिष्ठा पाएंगे , यही शुभकामना है !

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