
The administration refused to accept Swami Avimukteshwarananda as Shankaracharya, a notice was posted outside the camp.
प्रयागराज, वाराणसी। शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद महराज और प्रयागराज मेला प्रशासन के बीच रार थमने का नाम नहीं ले रहा है। इस मामले में नया मोड़ तब आया है जब सोमवार की देर रात प्रयागराज मेला प्राधिकरण ने शंकराचार्य को नोटिस भेजकर उनसे शंकराचार्य होने का जवाब मांगा है। इससे पहले शंकराचार्य ने सोमवार दोपहर प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा- प्रशासन के माफी न मांगने तक हम अपने आश्रम में प्रवेश नहीं करेंगे, बल्कि फुटपाथ पर ही रहेंगे, क्योंकि, शंकराचार्य जब भी इतिहास में स्नान करने गए हैं, पालकी में ही गए हैं, मैं प्रण लेता हूं कि हर मेले के लिए प्रयागराज आऊंगा, लेकिन कभी भी शिविर में नहीं, फुटपाथ पर ही रहूंगा।
इसके बाद माघ मेला प्रशासन ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को नोटिस जारी किया है। नोटिस में सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए कहा गया है कि किसी भी धर्माचार्य का ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य के रूप में पट्टाभिषेक नहीं हुआ है, इसके बावजूद शिविर के बोर्ड पर खुद को शंकराचार्य प्रदर्शित करना इस आदेश की अवहेलना है।
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प्रशासन ने 24 घंटे के भीतर जवाब देने का निर्देश दिया है। देर रात नोटिस लेकर पहुंचे कानूनगो को समर्थकों ने यह कहते हुए लौटा दिया कि सुबह आइए। अभी कोई पदाधिकारी नहीं है जो नोटिस रिसीव कर सके। आगे क्या होता है इसपर सभी की निगाहें टिकी है। इधर सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे को लेकर अनेक चर्चाएं चल रही हैं कोई शंकराचार्य के पक्ष में लिख रहा है तो कोई शंकराचार्य के विरोध में भी बातें कर रहा है।
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