
नई दिल्ली, 15 अगस्त 2026: देश की 80वीं स्वतंत्रता दिवस वर्षगांठ के मौके पर एक नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में ध्वजारोहण समारोह के दौरान ‘वंदे मातरम’ गाए जाने को लेकर भाजपा और कांग्रेस आमने-सामने आ गए हैं।
क्या है मामला?
भारतीय जनता पार्टी ने आरोप लगाया है कि कांग्रेस मुख्यालय में कार्यकर्ताओं द्वारा जब पूरा वंदे मातरम गाया जा रहा था, तब सोनिया गांधी और राहुल गांधी असहज दिखे और उन्होंने गायन को बीच में ही रोकने का इशारा किया। कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक कार्यकर्ताओं ने वंदे मातरम के शुरुआती हिस्से के बाद भी गायन जारी रखा, इसी दौरान राहुल और सोनिया गांधी की ओर से गायन रोकने का इशारा किया गया, लेकिन कार्यकर्ताओं ने इसे नहीं रोका। बताया जा रहा है कि कांग्रेस सेवा दल के पूर्व अध्यक्ष लालजी देसाई ने बीच में हस्तक्षेप कर गायन पूरा कराया, जिसके बाद राहुल और सोनिया गांधी की उनसे बातचीत भी हुई।
गौरतलब है कि यह विवाद ऐसे समय हुआ है जब केंद्रीय गृह मंत्रालय के 2026 के नए प्रोटोकॉल में वंदे मातरम के सभी छह अंतरों को गाने का निर्देश दिया गया है।
कांग्रेस की सफाई
भाजपा के आरोपों पर कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। पार्टी नेता जयराम रमेश ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि सोनिया गांधी ने गायन रोकने की कोशिश नहीं की थी, बल्कि वे मल्लिकार्जुन खरगे के लिए कुर्सी मंगवाने की बात कर रही थीं, जो काफी देर से खड़े थे।
कांग्रेस की ओर से यह भी कहा गया कि सोनिया गांधी वरिष्ठ नेता खरगे के लिए कुर्सी की व्यवस्था कर रही थीं और उनका राष्ट्रगीत का अपमान करने का कोई इरादा नहीं था। पार्टी का दावा है कि कार्यक्रम में नए कानून के अनुसार पूरा वंदे मातरम गाया गया।
राजनीतिक प्रतिक्रिया
भाजपा ने इस पूरे घटनाक्रम को गांधी परिवार की राष्ट्रीय प्रतीकों और सांस्कृतिक मूल्यों के प्रति असहजता से जोड़ते हुए निशाना साधा है। वहीं यह भी उल्लेखनीय है कि लगातार दूसरे साल लाल किले के स्वतंत्रता दिवस समारोह में मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी शामिल नहीं हुए, जिसे लेकर सीट विवाद की चर्चाएं भी चल रही हैं।