राज्य

धर्म मिटाने वाला न कोई हुआ है न होगा : राजेश शास्त्री

अलग-अलग युग में अलग-अलग कथाओं का जन्म हुआ है। लेकिन कलयुग में सभी युगों की कथाएं मिली हैं। जब-जब धर्म पर संकट आया है तब-तब इसे बचाने के लिए भगवान ने स्वयं किसी न किसी रूप में अवतार लिया है। धर्म को मिटाने वाला आज तक न कोई पैदा हुआ है न ही होगा।उक्त विचार कथा व्यास राजेश शास्त्री ने व्यक्त किया। वे बांसी तहसील व मिठवल ब्लाक क्षेत्र के काजी रुधौली चौराहे पर आयोजित श्रीमद्भागवत महापुराण ज्ञान यज्ञ के पांचवे दिन श्री कृष्ण जन्म की कथा का प्रवचन कर रहे थे। उन्होंने कहा कि व्यक्ति यदि दूसरों का हित करे तो उसका हित स्वयं हो जाता है। उन्होंने कहा कि कथा व्यास सुकदेव जी महाराज से राजा परीक्षित ने चौथे दिन की कथा में भगवान कृष्ण की कथा सुनाने का आग्रह किया। तो इन्होंने पहले संक्षेप में पूरी कथा उन्हें सुना दिया। लेकिन जब परीक्षित ने विस्तार से सुनने की आग्रह किया। तो कथा व्यास ने चन्द्र वंश के आरम्भ से उसके अंत तक की कथा उन्हें सुनाई। कथा व्यास शास्त्री ने कहा कि आज इंसान ईर्ष्या में मरा जा रहा है। दूसरों का सुख देखकर वह दुखी है। जबकि ईश्वर उसे सबकुछ दिया है। वह माया में इस तरह उलझा है कि उसे अपने मुक्ति का मार्ग भी नही सूझ रहा है। लोग मंदिर जाते ही लेकिन मंदिर में बैठे भगवान की मूरत को मंदिर में रहने तक ही हृदय में बसा पाते हैं। मंदिर से बाहर निकलने के बाद भी यदि उसी मूरत को मन में बसा लें, तो मोक्ष प्राप्त करने के लिए इंसान को और कुछ करने की जरूरत नही है। पूजा पांडाल में श्री कृष्ण का जन्मोत्सव बड़े ही धूमधाम से मनाया गया। भक्ति व बधाई आदि गीतों से वातावरण भक्तिमय हो गया। कथा में मुख्य यजमान सम्पूर्णानन्द शुक्ल व श्रीमती प्रकाशमती शुक्ला के अलावा आचार्य सन्तोष मिश्र व आशुतोष मिश्र, चन्द्रमणि शुक्ल, श्रीमती उषा शुक्ला, अखिलेश चन्द्र शुक्ल, अमित कुमार शुक्ल, धीरेंद्र कुमार शुक्ल, आलोक कुमार शुक्ल, देवेंद्र कुमार शुक्ल, रविकांत शुक्ल, नीलम शुक्ला, पूनम शुक्ला, अगस्त्य, प्रभाष, नैना, मानसी, अदिति, गरिमा, शिवम, अजय पाण्डेय आदि सहित तमाम श्रोता शामिल रहे।

संदिग्ध परिस्थिति में 55 वर्षीय वृद्ध की मौत

 

Brijesh Kumar